परिचय
नवग्रह — वैदिक ज्योतिष के नौ ग्रह
नवग्रह — अर्थात "नौ ग्रहण करने वाले" — वे नौ खगोलीय शक्तियां हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष मानव जीवन के मुख्य नियंता मानता है। पाश्चात्य ज्योतिष के विपरीत, ज्योतिष शास्त्र सूर्य और चंद्रमा को भी ग्रह मानता है और चंद्रमा के दोनों छाया नोड — राहु और केतु — को भी, इस प्रकार कुल नौ ग्रह बनते हैं। प्रत्येक ग्रह केवल एक भौतिक पिंड नहीं, बल्कि एक जीवित कार्मिक चेतना है।
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में प्रत्येक ग्रह को एक विशेष काया, स्वभाव, तत्व, दिशा, रंग, धातु, रत्न और सप्ताह का दिन दिया गया है। इन संगतियों से एक पूर्ण पद्धति बनती है: ग्रह की प्रकृति और जन्म कुंडली में उसकी स्थिति से पूरे जीवन का पाठ संभव है — स्वास्थ्य, धन, आध्यात्मिक पुकार और विंशोत्तरी दशा पद्धति द्वारा घटनाओं का समय।
सात दृश्य ग्रह सप्ताह के सात दिनों, एक या दो राशियों और छह से बीस वर्ष की महादशा के स्वामी हैं। राहु और केतु — छाया ग्रह — किसी राशि के स्वामी नहीं हैं, परंतु जहां स्थित हों वहां शक्तिशाली ग्रहण और कार्मिक प्रभाव डालते हैं। नवग्रह मिलकर वह ग्रह-मंत्रिमंडल बनाते हैं जो जन्म से मोक्ष तक के समस्त अनुभव का संचालन करता है।
नौ ग्रह
Surya · Sun
Sunday · Ruby (Manikya)
स्वामी: Leo
Chandra · Moon
Monday · Pearl (Moti)
स्वामी: Cancer
Mangal · Mars
Tuesday · Red Coral (Moonga)
स्वामी: Aries, Scorpio
Budha · Mercury
Wednesday · Emerald (Panna)
स्वामी: Gemini, Virgo
Brihaspati · Jupiter
Thursday · Yellow Sapphire (Pukhraj)
स्वामी: Sagittarius, Pisces
Shukra · Venus
Friday · Diamond (Heera) or White Sapphire
स्वामी: Taurus, Libra
Shani · Saturn
Saturday · Blue Sapphire (Neelam)
स्वामी: Capricorn, Aquarius
Rahu · Rahu
Saturday (shares with Saturn) · Hessonite Garnet (Gomed)
स्वामी: Aquarius (co-lord, some schools)
Ketu · Ketu
Tuesday (shares with Mars) · Cat's Eye (Lahsunia)
स्वामी: Scorpio (co-lord, some schools)
सामान्य प्रश्न
नवग्रह कौन-कौन से हैं?
नवग्रह वे नौ खगोलीय शक्तियां हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष मानव जीवन का मुख्य नियंता मानता है: सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु (बृहस्पति), शुक्र, शनि और दोनों छाया ग्रह राहु और केतु। प्रत्येक ग्रह एक विशेष कार्मिक सिद्धांत, देवता और कंपन आवृत्ति का प्रतिनिधित्व करता है।
सबसे शक्तिशाली ग्रह कौन सा है?
शास्त्रीय ज्योतिष में सूर्य नवग्रहों का राजा और आत्मा का कारक है। परंतु किसी भी व्यक्ति की कुंडली में सबसे शक्तिशाली ग्रह वह होता है जो षड्बल में श्रेष्ठ हो, केंद्र-त्रिकोण में स्थित हो और लग्नेश से शुभ संबंध रखता हो।
शुभ और अशुभ ग्रहों में क्या अंतर है?
नैसर्गिक शुभ ग्रह हैं — गुरु, शुक्र, शुक्ल पक्ष का चंद्र और शुभ ग्रहों से युक्त बुध। नैसर्गिक पाप ग्रह हैं — सूर्य, मंगल, शनि, कृष्ण पक्ष का चंद्र, राहु और केतु। परंतु कार्यात्मक शुभत्व लग्न के अनुसार बदलता है — त्रिकोण (5, 9) का स्वामी कार्यात्मक शुभ होता है चाहे उसकी प्रकृति कुछ भी हो।
नवग्रह दैनिक जीवन को कैसे प्रभावित करते हैं?
सात दृश्य ग्रह सप्ताह के सात दिनों के स्वामी हैं। जन्म कुंडली में इनकी स्थिति स्वास्थ्य, करियर, विवाह और व्यक्तित्व को आकार देती है। गोचर — विशेषकर शनि और गुरु का — महत्वपूर्ण जीवन घटनाओं को समयबद्ध करता है। विंशोत्तरी महादशा प्रणाली यह बताती है कि किस समय कौन सा ग्रह जीवन में प्रमुख है।