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खंड १ · अंक १ · स्था. MMXXVIरविवार, 14 जून 2026मुफ्त · वैदिक · सटीक
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वैदिक ज्योतिष एवं ज्योतिष गणना

वैदिक ग्रह मार्गदर्शिका

गुरु

गुरु ग्रह, प्रभाव, उपाय और वैदिक ज्योतिष में महत्व

Brihaspati · Jupiter · Thursday · Yellow / Gold

दिन

Thursday

रत्न

Yellow Sapphire (Pukhraj)

रंग

Yellow / Gold

स्वामी राशि

Sagittarius, Pisces

परिचय

बृहस्पति, गुरु, नवग्रहों में सबसे बड़े नैसर्गिक शुभ ग्रह हैं और देवताओं के प्रेरक शिक्षक हैं। बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में इन्हें "विशाल काया, भूरे बाल-नेत्र, कफ प्रकृति और सभी शास्त्रों के ज्ञाता" के रूप में वर्णित किया गया है। कर्क राशि के 5° पर उच्च गुरु सर्वाधिक उदार, ज्ञानमय और रक्षात्मक होते हैं। शरीर में ये वसा ऊतक, यकृत, जंघाएं और अंतःस्रावी तंत्र के कारक हैं। धनकारक, पुत्रकारक और विद्याकारक के रूप में बलवान गुरु समृद्धि, संतान और उच्च ज्ञान के सबसे विश्वसनीय संकेतकों में से एक हैं।

प्रमुख विशेषताएं

  • ज्ञान, दर्शन और धर्म के महाकारक
  • धन, समृद्धि और विस्तार
  • संतान और रचनात्मक प्रसव (पुत्रकारक)
  • गुरु, शिक्षक और आध्यात्मिक मार्गदर्शक
  • कर्क में उच्च (5°); मकर में नीच (5°)
  • गुरुवार का स्वामी और पुखराज रत्न

शास्त्रीय महत्व

शतपथ ब्राह्मण में बृहस्पति को "ब्रह्मणस्पति", पवित्र वाणी के स्वामी, कहा गया है। गजकेसरी योग, चंद्रमा से केंद्र में गुरु, ज्योतिष का सर्वाधिक प्रसिद्ध शुभ योग है जो "हाथी जैसी महिमा, सिंह जैसा साहस और स्थायी यश" प्रदान करता है। गुरु की दृष्टि किसी भी भाव या ग्रह पर पड़ने से वह रक्षित और उन्नत हो जाता है।

उच्च, नीच और ग्रह-संबंध

उच्च राशि

Cancer (5°)

नीच राशि

Capricorn (5°)

स्वराशि

Sagittarius, Pisces

मित्र ग्रह

Sun, Moon, Mars

शत्रु ग्रह

Mercury, Venus

सम ग्रह

Saturn

ग्रह-संगतियां

रत्न

Yellow Sapphire (Pukhraj)

दिन

Thursday

रंग

Yellow / Gold

उपाय (Upayas)

  1. गुरुवार को गुरु अष्टकम, बृहस्पति स्तोत्र या गीता के प्रथम अध्याय का पाठ करें
  2. विष्णु या दक्षिणामूर्ति मंदिर में पीले फूल, हल्दी या पीले वस्त्र अर्पित करें
  3. गुरुवार को पीले भोजन, केला, हल्दी वाले चावल, का सेवन करते हुए व्रत रखें
  4. पीले वस्त्र, सोना, पुस्तकें, हल्दी या चने की दाल का दान करें
  5. मंत्र: "ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः", 19,000 जप

सामान्य प्रश्न

गजकेसरी योग क्या है?

जब गुरु जन्म चंद्रमा से केंद्र (1, 4, 7, 10वें भाव) में हों तो गजकेसरी योग बनता है। "गज" अर्थात हाथी, स्मृति और महिमा का प्रतीक, और "केसरी" अर्थात सिंह, साहस और सत्ता का। शास्त्र इस योग के जातकों को वाकपटु, समृद्ध और यशस्वी बताते हैं।

गुरु की 16 वर्षीय महादशा कैसी होती है?

बलवान गुरु की महादशा ज्ञान, विवाह, संतान, संपत्ति और उच्च शिक्षा में उत्कृष्ट फल देती है। धर्म-कर्म, तीर्थयात्रा और आध्यात्मिक उन्नति भी इस दशा में होती है। पीड़ित गुरु की दशा में यकृत रोग, संतान में बाधा और धर्म से विमुखता हो सकती है।

गुरु मकर में नीच क्यों होते हैं?

मकर शनि की राशि है, कठोर व्यावहारिकता और कर्म-सीमाओं का क्षेत्र। यहां गुरु की उदारता और आदर्शवाद संकुचित हो जाता है। परंतु नीच भंग योग से यह गुरु संसार-ज्ञान से परिपक्व होकर बहुत व्यावहारिक ज्ञान देने वाला बनता है।

गुरु की दृष्टि का क्या महत्व है?

गुरु की दृष्टि किसी भी भाव या ग्रह को संरक्षित और उन्नत करती है। शास्त्रों में कहा गया है कि "गुरोर्दृष्टिः सर्वत्र शुभ", गुरु की दृष्टि जहां पड़े वहां शुभ होता है। 5वें, 7वें और 9वें भाव पर विशेष दृष्टि के कारण गुरु इन भावों को विशेष रूप से आशीर्वाद देते हैं।

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