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वैदिक ग्रह मार्गदर्शिका

🌙चंद्र

चंद्र ग्रह — प्रभाव, उपाय और वैदिक ज्योतिष में महत्व

Chandra · Moon · Monday · White / Silver

दिन

Monday

रत्न

Pearl (Moti)

रंग

White / Silver

स्वामी राशि

Cancer

परिचय

चंद्रमा ज्योतिष में मन, भावनाओं और मनोवैज्ञानिक जगत के कारक हैं। जहां सूर्य आत्मा का प्रतिनिधित्व करते हैं, वहीं चंद्र मन (मनस) का — वह तरल, परिवर्तनशील चेतना जो जीवन के हर अनुभव को संसाधित करती है। चंद्रमा का वृद्धि-क्षय चक्र कुंडली में एक जीवंत गत्यात्मकता उत्पन्न करता है। शुक्ल पक्ष का चंद्रमा नैसर्गिक शुभ और कृष्ण पक्ष का अशुभ माना जाता है। जन्म नक्षत्र — चंद्रमा की नक्षत्र स्थिति — विंशोत्तरी दशा का प्रारंभिक बिंदु निर्धारित करती है। इनकी महादशा 10 वर्ष की होती है और सोमवार इनका दिन है।

प्रमुख विशेषताएं

  • मन, भावनाएं और संवेदनशीलता के मुख्य कारक
  • माता, मातृपक्ष और पोषण से संबंध
  • बाईं आंख, छाती, फेफड़े और शरीर के तरल पदार्थ
  • शुक्ल पक्ष का चंद्र शुभ; कृष्ण पक्ष में कमज़ोर
  • जनता, समाज और लोकप्रियता के कारक
  • सोमवार का स्वामी और चांदी से संबंधित

शास्त्रीय महत्व

ऋग्वेद में चंद्रमा को सोम — अमृत और वनस्पति के पोषक — के रूप में स्तुत किया गया है। ज्योतिष में 27 चंद्र नक्षत्र प्रत्येक विशेष गुण, देवता और ग्रह स्वामी के साथ एक संपूर्ण विद्या बनाते हैं। गजकेसरी योग — चंद्र-गुरु की युति या केंद्र स्थिति — ज्योतिष के सबसे प्रसिद्ध शुभ योगों में से एक है जो बुद्धि, वाग्मिता और सम्मान प्रदान करता है।

उच्च, नीच और ग्रह-संबंध

उच्च राशि

Taurus (3°)

नीच राशि

Scorpio (3°)

स्वराशि

Cancer

मित्र ग्रह

Sun, Mercury

शत्रु ग्रह

सम ग्रह

Mars, Jupiter, Venus, Saturn

ग्रह-संगतियां

रत्न

Pearl (Moti)

दिन

Monday

रंग

White / Silver

उपाय (Upayas)

  1. सोमवार को चंद्र अष्टकम या शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ करें
  2. शिवलिंग पर दूध, सफेद फूल या चावल अर्पित करें
  3. सोमवार को व्रत रखें या एकादशी का आंशिक उपवास करें
  4. सोमवार को दूध, चावल, सफेद वस्त्र या चांदी का दान करें
  5. मंत्र: "ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः" — 11,000 जप

सामान्य प्रश्न

वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं?

पाश्चात्य ज्योतिष के विपरीत, वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को केंद्रीय महत्व दिया गया है। चंद्रमा मन (मनस) के कारक हैं और जन्म नक्षत्र विंशोत्तरी दशा का प्रारंभिक बिंदु है। चंद्र राशि से ही गोचर, अष्टकवर्ग और विवाह संगतता का आकलन किया जाता है।

जन्म नक्षत्र का क्या महत्व है?

जन्म नक्षत्र — जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में हो — विंशोत्तरी दशा का प्रारंभ निर्धारित करता है। नामकरण संस्कार में नाम का पहला अक्षर भी जन्म नक्षत्र के अनुसार रखा जाता है। 27 नक्षत्र प्रत्येक विशेष स्वभाव, देवता और फल के साथ एक पूर्ण भविष्यवाणी का साधन हैं।

चंद्रमा की महादशा में क्या अनुभव होता है?

चंद्र महादशा 10 वर्ष की होती है। बलवान चंद्र की दशा में भावनात्मक संतुलन, मातृसुख, जन-समर्थन और संपत्ति का लाभ होता है। पीड़ित चंद्र की दशा में मानसिक अशांति, माता से कठिनाई और जल या पेट संबंधी समस्याएं आ सकती हैं।

वृश्चिक में नीच चंद्रमा का क्या प्रभाव होता है?

वृश्चिक राशि के 3° पर चंद्रमा नीच के होते हैं जो मन की अत्यधिक तीव्रता, भावनात्मक अस्थिरता और माता से जटिल संबंध का संकेत दे सकते हैं। नीच भंग राजयोग, बलवान लग्न या चंद्र पर गुरु की दृष्टि इन प्रभावों को काफी कम कर सकती है।

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