माँ यमुना · भक्ति गीत
श्री यमुना जी की आरती
Yamuna Aarti
यमुना आरती पवित्र यमुना नदी की भक्ति में गाई जाती है, जो सूर्य देव की पुत्री और यम की जुड़वाँ बहन हैं। वृंदावन और मथुरा में भगवान कृष्ण के बचपन से गहरे जुड़ी यमुना हिंदू धर्म की सबसे पवित्र नदियों में से एक हैं। मथुरा और वृंदावन में होने वाली भव्य संध्या आरती में हजारों तीर्थयात्री शामिल होते हैं।
अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · पारंपरिक हिंदू भक्ति गीत
श्री यमुना जी की आरती के लाभ
- ·मृत्यु के भय और यम-दंड से मुक्ति
- ·यमुना स्नान से सभी पापों का शुद्धिकरण
- ·वृंदावन में कृष्ण की दिव्य लीला से जुड़ाव
- ·पितरों की मुक्ति और दिवंगत आत्माओं को शांति
पाठ का सर्वोत्तम समय
यमुना छठ (कार्तिक शुक्ल सप्तमी), जन्माष्टमी और प्रत्येक संध्या मथुरा एवं वृंदावन के घाटों पर।
श्री यमुना जी की आरती — संपूर्ण पाठ
॥ श्री यमुना जी की आरती ॥
टेक
जय यमुना माता, जय यमुना माता। सूर्य-सुता कालिंदी, भक्तों की सुखदाता॥
॥ 1 ॥
यमुनोत्री से निकली, कल-कल धारा बहती। मथुरा-वृंदावन में, कृष्ण-लीला कहती॥ जय यमुना माता, जय यमुना माता। सूर्य-सुता कालिंदी, भक्तों की सुखदाता॥
॥ 2 ॥
कालिय-दमन किया प्रभु, यमुना के तट पर। गोपी संग रास रचाए, घाटों के पट पर॥ जय यमुना माता, जय यमुना माता। सूर्य-सुता कालिंदी, भक्तों की सुखदाता॥
॥ 3 ॥
यम की बहन यमुना माँ, भय-हरे मृत्यु का। स्नान करे जो यमुना में, पाए मोक्ष का॥ जय यमुना माता, जय यमुना माता। सूर्य-सुता कालिंदी, भक्तों की सुखदाता॥
सामान्य प्रश्न
प्र.यमुना स्नान से यम के भय से मुक्ति क्यों मिलती है?
यमुना यम की बहन हैं। शास्त्रों में उल्लेख है कि यम ने स्वयं घोषित किया कि वे अपनी बहन के पवित्र जल में स्नान करने वालों को कभी कष्ट नहीं देंगे। यमुना स्नान, विशेषकर यमुना छठ पर, अकाल मृत्यु के भय और परलोक में दंड से मुक्ति देता है।
प्र.कृष्ण के जीवन में यमुना का क्या महत्व है?
यमुना कृष्ण की सम्पूर्ण वृंदावन लीला की पृष्ठभूमि है। बचपन में उन्होंने इसके तट पर खेला, इसके जल में कालिय नाग को पराजित किया, इसके किनारे महारास किया और वसुदेव ने तूफान में उन्हें मथुरा से गोकुल ले जाते समय इसे पार किया। यह नदी वैष्णव भक्ति से अभिन्न है।
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