भगवान शिव · भक्ति गीत
ॐ जय शिव ओंकारा आरती
Om Jai Shiv Omkara Aarti
ॐ जय शिव ओंकारा भगवान शिव की सर्वाधिक पवित्र आरती है। विशेष रूप से सोमवार, महाशिवरात्रि और सावन में गाई जाने वाली यह आरती शिव को ब्रह्मा, विष्णु और महेश — तीनों रूपों में स्तुत करती है।
अंतिम अपडेट: 19 अप्रैल 2026 · पारंपरिक हिंदू भक्ति गीत
ॐ जय शिव ओंकारा आरती के लाभ
- ·मोक्ष और कर्मिक चक्र से मुक्ति
- ·अहंकार और नकारात्मक प्रवृत्तियों का नाश
- ·रोग और अकाल मृत्यु से सुरक्षा
- ·गहरी आध्यात्मिक इच्छाओं की पूर्ति
पाठ का सर्वोत्तम समय
सोमवार, महाशिवरात्रि, सावन माह और प्रदोष काल।
ॐ जय शिव ओंकारा आरती — संपूर्ण पाठ
॥ ॐ जय शिव ओंकारा आरती ॥
टेक
ॐ जय शिव ओंकारा स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥
॥ 1 ॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे। हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥
॥ 2 ॥
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे। त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव ओंकारा स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥
॥ 3 ॥
अक्षमाला वनमाला मुंडमाला धारी। त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥
॥ 4 ॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघाम्बर अंगे। सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव ओंकारा स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥
॥ 5 ॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूलधारी। जगकर्ता जगहर्ता जगपालन कारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥
॥ 6 ॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका॥ ॐ जय शिव ओंकारा स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥
॥ 7 ॥
त्रिगुण स्वामीजी की आरति जो कोई नर गावे। कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय शिव ओंकारा स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥
सामान्य प्रश्न
प्र.ॐ जय शिव ओंकारा का अर्थ क्या है?
"ॐ जय शिव ओंकारा" का अर्थ है — "ॐ (प्रणव ध्वनि) के स्वरूप भगवान शिव की जय।" यह आरती शिव को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के रूप में स्तुत करती है — ब्रह्मांडीय सृष्टि के तीनों पक्ष।
प्र.ॐ जय शिव ओंकारा कब गाएँ?
सोमवार की शाम, महाशिवरात्रि, सावन माह के सभी दिन और प्रदोष काल सर्वाधिक शुभ हैं। अनेक भक्त इसे शिव अभिषेक के बाद गाते हैं।