भगवान विष्णु / नारायण · भक्ति गीत
ॐ जय जगदीश हरे आरती
Om Jai Jagdish Hare Aarti
ॐ जय जगदीश हरे सबसे व्यापक रूप से गाई जाने वाली विष्णु आरती है, जो लगभग हर हिंदू परिवार की दैनिक पूजा में शामिल है। यह जगत के स्वामी की स्तुति करती है और दुःख निवारण, मनोकामना पूर्ति और मोक्ष का आशीर्वाद माँगती है।
अंतिम अपडेट: 13 मई 2026 · पारंपरिक हिंदू भक्ति गीत
ॐ जय जगदीश हरे आरती के लाभ
- ·दुःख और दीर्घकालिक कठिनाइयों से राहत
- ·हार्दिक मनोकामनाओं की पूर्ति
- ·रोग और दुर्भाग्य से सुरक्षा
- ·आध्यात्मिक मुक्ति और दिव्य कृपा
पाठ का सर्वोत्तम समय
प्रतिदिन संध्या पूजा, गुरुवार, एकादशी और विष्णु पूजा के दौरान।
ॐ जय जगदीश हरे आरती, संपूर्ण पाठ
॥ ॐ जय जगदीश हरे आरती ॥
टेक
ॐ जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
॥ 1 ॥
जो ध्यावे फल पावे दुख बिनसे मन का। सुख-संपत्ति घर आवे कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट क्षण में दूर करे॥
॥ 2 ॥
मात-पिता तुम मेरे शरण गहूँ मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा आस करूँ मैं जिसकी॥ ॐ जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट क्षण में दूर करे॥
॥ 3 ॥
तुम पूरण परमात्मा तुम अंतरयामी। पार ब्रह्म परमेश्वर तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट क्षण में दूर करे॥
॥ 4 ॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता। मैं मूरख खल कामी कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट क्षण में दूर करे॥
॥ 5 ॥
तुम हो एक अगोचर सबके प्राणपति। किस विध मिलूँ दयामय तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट क्षण में दूर करे॥
॥ 6 ॥
दीनबंधु दुखहर्ता तुम रक्षक मेरे। करुणा हस्त बढ़ाओ द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट क्षण में दूर करे॥
॥ 7 ॥
विषय-विकार मिटाओ पाप हरो देवा। श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ संतन की सेवा॥ ॐ जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट क्षण में दूर करे॥
सामान्य प्रश्न
प्र.क्या ॐ जय जगदीश हरे केवल विष्णु पूजा के लिए है?
यह आरती भगवान विष्णु के लिए रची गई है, परंतु इसे लगभग सभी हिंदू पूजाओं में गाया जाता है। इसका सार्वभौमिक आह्वान इसे सभी रूपों की उपासना के लिए उपयुक्त बनाता है।
प्र.ॐ जय जगदीश हरे कितनी बार गाएँ?
यह आमतौर पर संध्या आरती में एक बार गाई जाती है। एकादशी, विष्णु जयंती और विशेष अवसरों पर 3, 7 या 11 बार गाने से अधिक आध्यात्मिक फल मिलता है।
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