आज: वैदिक ज्योतिष · प्राचीन · सटीक · मुफ्त
खंड १ · अंक १ · स्था. MMXXVIशुक्रवार, 24 अप्रैल 2026मुफ्त · वैदिक · सटीक
VedicBirth
वैदिक ज्योतिष एवं ज्योतिष गणना

श्री विठ्ठल / विठोबा, पंढरपुर · भक्ति गीत

विठ्ठल आरती (जय जय विठ्ठल)

Vitthal Aarti (Jai Jai Vitthal)

देवताश्री विठ्ठल / विठोबा, पंढरपुर
प्रकारआरती (भक्ति गीत)
भाषाहिंदी (देवनागरी)

विठ्ठल आरती महाराष्ट्र की वारकरी भक्ति-परंपरा की आत्मा है। भीमा नदी के तट पर पंढरपुर विठ्ठल मंदिर में गाई जाने वाली यह आरती विठ्ठल — विष्णु/कृष्ण के एक रूप — की स्तुति करती है, जो ईंट (विट) पर कमर पर हाथ रखकर अपने भक्तों की अनंत धैर्य से प्रतीक्षा करते हैं।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · पारंपरिक हिंदू भक्ति गीत

विठ्ठल आरती (जय जय विठ्ठल) के लाभ

  • ·भक्ति के माध्यम से मोक्ष
  • ·तीर्थयात्रियों और साधकों के लिए शांति और संतुष्टि
  • ·वारकरी संत-परंपरा (ज्ञानेश्वर, तुकाराम, नामदेव) का आशीर्वाद
  • ·शुद्ध प्रेम और समर्पण के मार्ग पर चलने वालों की कृपा

पाठ का सर्वोत्तम समय

आषाढ़ी एकादशी और कार्तिकी एकादशी (वारी तीर्थयात्रा के दिन), और प्रत्येक एकादशी।

विठ्ठल आरती (जय जय विठ्ठल) — संपूर्ण पाठ

॥ श्री विठ्ठल आरती ॥

टेक

जय जय विठ्ठल, जय हरि विठ्ठल। पंढरपुर निवासी, कटि-कर विठ्ठल॥

1

भीमा-तट पर ठाड़े, ईंट पर पाँव। पुंडलिक के कारण, रहे इसी ठाँव॥ जय जय विठ्ठल, जय हरि विठ्ठल। पंढरपुर निवासी, कटि-कर विठ्ठल॥

2

ज्ञानदेव, तुकाराम, नामदेव-नारे। वारकरी भक्त-जन, चरण में हारे॥ जय जय विठ्ठल, जय हरि विठ्ठल। पंढरपुर निवासी, कटि-कर विठ्ठल॥

3

आषाढ़ी-कार्तिकी, वारी की राह। लाखों चरण चलते, प्रभु के पास॥ जय जय विठ्ठल, जय हरि विठ्ठल। पंढरपुर निवासी, कटि-कर विठ्ठल॥

सामान्य प्रश्न

प्र.विठ्ठल कौन हैं और वे ईंट पर क्यों खड़े हैं?

विठ्ठल (विठोबा या पांडुरंग) महाराष्ट्र के पंढरपुर के मुख्य देवता हैं — विष्णु या कृष्ण का एक रूप। उनकी मूर्ति में वे ईंट (विट) पर कमर पर हाथ रखकर खड़े हैं। किंवदंती के अनुसार, उनके भक्त पुंडलिक माता-पिता की सेवा में इतने तल्लीन थे कि विठ्ठल के आने पर उन्होंने खड़े होने के लिए ईंट फेंकी। माता-पिता के प्रति इस भक्ति से प्रसन्न होकर विठ्ठल ईंट पर खड़े रह गए।

प्र.वारकरी परंपरा और वारी तीर्थयात्रा क्या है?

वारकरी परंपरा महाराष्ट्र का विठ्ठल-भक्ति आंदोलन है। वारकरी साल में दो बार पंढरपुर पैदल जाते हैं — आषाढ़ी एकादशी और कार्तिकी एकादशी पर। ज्ञानेश्वर, नामदेव, एकनाथ और तुकाराम जैसे संतों ने अभंगों की रचना कर इस परंपरा को आकार दिया। प्रत्येक वारी में 5–10 लाख तीर्थयात्री शामिल होते हैं।

अन्य आरतियाँ