वायु देव (पवन देव) · भक्ति गीत
वायु देव आरती
Vayu Dev Aarti
वायु देव आरती वायु देव की स्तुति करती है — वायु और श्वास के वैदिक देवता, पंच महाभूतों में से एक। हनुमान और भीम के पिता, वायु जीवन-शक्ति (प्राण) स्वयं हैं। यह आरती उस अदृश्य किंतु सर्वव्यापी दिव्य उपस्थिति का सम्मान करती है जो श्वास के माध्यम से सारे जीवन को जीवित रखती है।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · पारंपरिक हिंदू भक्ति गीत
वायु देव आरती के लाभ
- ·स्वस्थ श्वसन, श्वांस-स्वास्थ्य और प्राण-संतुलन
- ·योगियों और प्राणायाम साधकों के लिए आशीर्वाद
- ·सभी जीवों में जीवन-शक्ति के साथ संबंध
- ·प्रकृति में अदृश्य दिव्य शक्ति के प्रति कृतज्ञता
पाठ का सर्वोत्तम समय
वट सावित्री पूजा, प्राणायाम अभ्यास से पहले और पंच भूत पूजन के दौरान।
वायु देव आरती — संपूर्ण पाठ
॥ वायु देव आरती ॥
टेक
जय वायु देव, जय पवन देवा। प्राण-शक्ति के दाता, जीवन-ज्योति-सेवा॥
॥ 1 ॥
अदृश्य पर सर्वत्र, तुम्हीं सब में व्यापे। श्वास-श्वास में तुम हो, जग-जीवन थापे॥ जय वायु देव, जय पवन देवा। प्राण-शक्ति के दाता, जीवन-ज्योति-सेवा॥
॥ 2 ॥
हनुमान के पिता, भीम के उद्गाता। वेदों में वर्णित, शक्ति के विधाता॥ जय वायु देव, जय पवन देवा। प्राण-शक्ति के दाता, जीवन-ज्योति-सेवा॥
॥ 3 ॥
प्राणायाम से जो, तुमको पहचाने। जीवन की अमृत-धारा, वो ही पाने॥ जय वायु देव, जय पवन देवा। प्राण-शक्ति के दाता, जीवन-ज्योति-सेवा॥
सामान्य प्रश्न
प्र.हिंदू पौराणिक कथाओं में वायु देव कौन हैं और उनका क्या महत्व है?
वायु (पवन या मारुत) वायु और प्राण के वैदिक देवता हैं। वे अष्ट दिक्पालों में से एक हैं — वायव्य दिशा के स्वामी। वे हनुमान के पिता (इसीलिए हनुमान का नाम पवनपुत्र) और महाभारत में भीम के पिता हैं। वैदिक ब्रह्मांड-विज्ञान में वायु प्राण — प्रत्येक प्राणी की प्रत्येक श्वास में विद्यमान जीवन-शक्ति — का प्रतिनिधित्व करते हैं।
प्र.वायु देव के लिए कोई विशेष पूजा या अनुष्ठान है?
वायु देव मुख्यतः पंच भूत पूजन और नवग्रह अनुष्ठानों के भाग के रूप में पूजे जाते हैं। महिलाएँ वट सावित्री पूजा में भी उनका स्मरण करती हैं। योगी और प्राणायाम साधक परंपरागत रूप से अभ्यास से पहले वायु देव का आह्वान करते हैं।
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