श्री शुक्र ग्रह देव · भक्ति गीत
श्री शुक्र देव जी की आरती
Shukra Aarti
शुक्र आरती दैत्यगुरु शुक्राचार्य और शुक्र ग्रह को समर्पित है, जो सौंदर्य, प्रेम, धन और कला के अधिपति हैं। वैदिक ज्योतिष में शुक्र भौतिक सुख, वैवाहिक सौहार्द और ललित कलाओं का कारक है। शुक्रवार को शुक्र पूजन से जन्मपत्री में कमज़ोर या पीड़ित शुक्र के दुष्प्रभाव दूर होते हैं।
अंतिम अपडेट: 14 जून 2026 · पारंपरिक हिंदू भक्ति गीत
श्री शुक्र देव जी की आरती के लाभ
- ·प्रेम, रोमांस और वैवाहिक सुख की प्राप्ति
- ·धन, विलास और भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि
- ·कला, संगीत, चलचित्र और सृजनात्मक क्षेत्रों में सफलता
- ·जन्मपत्री में शुक्र-दोष से मुक्ति
पाठ का सर्वोत्तम समय
शुक्रवार की सुबह और संध्या; विशेष रूप से शुक्र होरा और शुक्र गोचर के दिन।
श्री शुक्र देव जी की आरती, संपूर्ण पाठ
॥ श्री शुक्र देव जी की आरती ॥
टेक
जय शुक्र देव दयाला, जय शुक्र देव दयाला। भृगुसुत दैत्यगुरु स्वामी, भक्तन के रखवाला॥
॥ 1 ॥
शुक्ल वर्ण तव काया, श्वेत वस्त्र सुहाए। रजत-रथ पर विराजें, चाँदी सा चमकाए॥ जय शुक्र देव दयाला, जय शुक्र देव दयाला। भृगुसुत दैत्यगुरु स्वामी, भक्तन के रखवाला॥
॥ 2 ॥
कला सौंदर्य के दाता, प्रेम के अधिपति। वैवाहिक सुख देते, धन-वैभव की संपति॥ जय शुक्र देव दयाला, जय शुक्र देव दयाला। भृगुसुत दैत्यगुरु स्वामी, भक्तन के रखवाला॥
॥ 3 ॥
मृत-संजीवनी विद्या, भृगु-पुत्र ने पाई। दैत्यों को जिलाया, मृत्यु-भय मिटाई॥ जय शुक्र देव दयाला, जय शुक्र देव दयाला। भृगुसुत दैत्यगुरु स्वामी, भक्तन के रखवाला॥
सामान्य प्रश्न
प्र.शुक्र आरती के लिए कौन सा दिन श्रेष्ठ है?
शुक्रवार शुक्र ग्रह का दिन है। शुक्रवार की सुबह सफेद फूल और सफेद मिठाई अर्पित कर, श्वेत या क्रीम रंग के वस्त्र पहनकर शुक्र आरती करने से शुक्र की सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और जन्मपत्री के शुक्र-दोष शांत होते हैं।
प्र.कमज़ोर शुक्र के क्या लक्षण हैं?
जन्मपत्री में कमज़ोर या पीड़ित शुक्र से रिश्तों में कठिनाई, सौंदर्यबोध की कमी, आर्थिक संघर्ष, प्रजनन स्वास्थ्य समस्याएँ या असंतोषजनक वैवाहिक जीवन हो सकता है। नियमित शुक्रवार पूजन और शुक्र बीज मंत्र "ॐ शुं शुक्राय नमः" के जप से शुक्र को बल मिलता है।