श्री राधा रानी · भक्ति गीत
श्री राधा जी की आरती
Radha Aarti
राधा आरती श्री राधा की वंदना में गाई जाती है, जो भगवान कृष्ण की परम भक्त और प्रिया हैं। वे भक्ति और दिव्य प्रेम के सर्वोच्च स्वरूप हैं। वृंदावन, मथुरा और सम्पूर्ण वैष्णव परम्पराओं में यह आरती निःशर्त प्रेम और आध्यात्मिक आनंद के लिए गाई जाती है।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · पारंपरिक हिंदू भक्ति गीत
श्री राधा जी की आरती के लाभ
- ·शुद्ध भक्ति और निःशर्त प्रेम का जागरण
- ·आध्यात्मिक विकास में बाधक अहंकार और आसक्ति का निवारण
- ·प्रेमपूर्ण और सौहार्दपूर्ण संबंध का आशीर्वाद
- ·आध्यात्मिक आनंद और ईश्वर से निकटता की प्राप्ति
पाठ का सर्वोत्तम समय
राधाष्टमी, होली, जन्माष्टमी और वृंदावन परम्परा में प्रतिदिन सूर्योदय पर।
श्री राधा जी की आरती — संपूर्ण पाठ
॥ श्री राधा जी की आरती ॥
टेक
आरती राधा रानी की कीजे। वृंदावन की राजदुलारी, प्रेम-सुधा रस पीजे॥
॥ 1 ॥
कुंजबिहारी संग विराजे, श्यामा रूप अपार। रासमंडल में नाचे राधा, करती प्रेम-प्रचार॥ आरती राधा रानी की कीजे। वृंदावन की राजदुलारी, प्रेम-सुधा रस पीजे॥
॥ 2 ॥
नयन कमल-से श्यामल केशा, मुख मंडल उजियार। पीत पट धारे नंद-दुलारे, राधा प्रेम अधार॥ आरती राधा रानी की कीजे। वृंदावन की राजदुलारी, प्रेम-सुधा रस पीजे॥
॥ 3 ॥
जो जन राधा नाम उचारे, मिटे भव का भार। कृपा करो वृषभानु-दुलारी, लीजे हमें उबार॥ आरती राधा रानी की कीजे। वृंदावन की राजदुलारी, प्रेम-सुधा रस पीजे॥
सामान्य प्रश्न
प्र.राधा की पूजा कृष्ण के साथ क्यों की जाती है?
राधा को भगवान कृष्ण की ह्लादिनी शक्ति माना जाता है। राधा के बिना कृष्ण का आनंद अपूर्ण है। वैष्णव दर्शन में राधा भक्ति का सर्वोच्च आदर्श हैं; उनकी कृष्ण के साथ पूजा दिव्य प्रेम का पूर्णतम अनुभव देती है।
प्र.राधाष्टमी क्या है और यह कब होती है?
राधाष्टमी श्री राधा की जयंती है, जो भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को — जन्माष्टमी के ठीक 15 दिन बाद — मनाई जाती है।
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