माँ नर्मदा · भक्ति गीत
श्री नर्मदा जी की आरती
Narmada Aarti
नर्मदा आरती पवित्र नर्मदा नदी की वंदना में गाई जाती है, जिसे मध्य भारत की सबसे पवित्र नदी और एक स्वतंत्र देवी माना जाता है। अन्य नदियों के विपरीत नर्मदा की परिक्रमा की जाती है। महेश्वर और अमरकंटक में संध्या आरती एक अत्यंत मनोहर दृश्य होती है।
अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · पारंपरिक हिंदू भक्ति गीत
श्री नर्मदा जी की आरती के लाभ
- ·कई जन्मों के संचित पापों का शुद्धिकरण
- ·नर्मदा के दर्शन मात्र से गंभीर रोगों का निवारण
- ·नर्मदा श्राद्ध से पितरों को मोक्ष
- ·नर्मदा परिक्रमा के समान आध्यात्मिक पुण्य
पाठ का सर्वोत्तम समय
नर्मदा जयंती (माघ शुक्ल सप्तमी), कार्तिक पूर्णिमा और प्रत्येक संध्या घाट पर।
श्री नर्मदा जी की आरती — संपूर्ण पाठ
॥ श्री नर्मदा जी की आरती ॥
टेक
जय नर्मदे माता, जय नर्मदे माता। अमरकंटक से निकली, जग की सुखदाता॥
॥ 1 ॥
मेकल पर्वत से निकली, कल-कल बहती धारा। विंध्य-सतपुड़ा के बीच, लहरों का कारा॥ जय नर्मदे माता, जय नर्मदे माता। अमरकंटक से निकली, जग की सुखदाता॥
॥ 2 ॥
शिव के जटा से उत्पन्न, रेवा नाम पाया। पाप-ताप सब हरती, दर्शन से मोक्ष-छाया॥ जय नर्मदे माता, जय नर्मदे माता। अमरकंटक से निकली, जग की सुखदाता॥
॥ 3 ॥
तट पर आकर जो ध्याए, भव-सागर तर जाए। नर्मदे हर बोलो, मुक्ति द्वार खुल जाए॥ जय नर्मदे माता, जय नर्मदे माता। अमरकंटक से निकली, जग की सुखदाता॥
सामान्य प्रश्न
प्र.नर्मदा को गंगा से अधिक पवित्र क्यों माना जाता है?
प्राचीन शास्त्रों के अनुसार जहाँ गंगा स्नान से पाप धुलते हैं, वहीं नर्मदा के जल को देखने या छूने मात्र से वही फल मिलता है। नर्मदा परिक्रमा — नदी की 1,312 किमी की पैदल परिक्रमा — मोक्ष प्रदान करती है। नर्मदा को रेवा भी कहा जाता है और वे विंध्य पर्वत की पुत्री मानी जाती हैं।
प्र.नर्मदा परिक्रमा का क्या महत्व है?
नर्मदा परिक्रमा नर्मदा नदी के दोनों किनारों पर पैदल चलने की पवित्र तीर्थयात्रा है — लगभग 1,312 किमी। पैदल पूरी होने में 3-5 वर्ष लगते हैं और इसे हिंदू धर्म के महानतम आध्यात्मिक अनुशासनों में से एक माना जाता है जो सम्पूर्ण शुद्धि और मोक्ष देता है।
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