माँ महालक्ष्मी · भक्ति गीत
महालक्ष्मी आरती
Mahalakshmi Aarti
महालक्ष्मी आरती देवी महालक्ष्मी को समर्पित प्रिय भक्ति स्तुति है, जो धन, भाग्य और समृद्धि की देवी हैं। शुक्रवार, दीवाली और लक्ष्मी पूजा पर गाई जाने वाली यह आरती भौतिक समृद्धि, आध्यात्मिक ऐश्वर्य और दरिद्रता के नाश के लिए उनका आशीर्वाद माँगती है।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · पारंपरिक हिंदू भक्ति गीत
महालक्ष्मी आरती के लाभ
- ·धन, आर्थिक समृद्धि और ऋण से मुक्ति
- ·व्यवसाय और करियर में तरक्की
- ·घर-परिवार में सुख और शांति
- ·अष्ट लक्ष्मी — सभी भौतिक और आध्यात्मिक रूपों की कृपा
पाठ का सर्वोत्तम समय
प्रत्येक शुक्रवार, दीवाली की रात, लक्ष्मी पंचमी और शरद पूर्णिमा।
महालक्ष्मी आरती — संपूर्ण पाठ
॥ श्री महालक्ष्मी जी की आरती ॥
टेक
जय महालक्ष्मी माता, मैया जय महालक्ष्मी माता। तुमको निशदिन ध्यावत, योगी संत विधाता॥
॥ 1 ॥
उमा रमा ब्रह्माणी तुम ही जग-माता। सूर्य चंद्रमा ध्यावत नारद ऋषि गाता॥ जय महालक्ष्मी माता, मैया जय महालक्ष्मी माता। तुमको निशदिन ध्यावत, योगी संत विधाता॥
॥ 2 ॥
दुर्गा रूप निरंजनी सुख सम्पत्ति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ जय महालक्ष्मी माता, मैया जय महालक्ष्मी माता। तुमको निशदिन ध्यावत, योगी संत विधाता॥
॥ 3 ॥
तुम पाताल-निवासिनी तुम ही शुभदाता। कर्म प्रभाव प्रकाशिनी भवनिधि की त्राता॥ जय महालक्ष्मी माता, मैया जय महालक्ष्मी माता। तुमको निशदिन ध्यावत, योगी संत विधाता॥
॥ 4 ॥
जिस घर में महालक्ष्मी आरती नित गावे। उस घर में सब सम्पदा, सुख शांति आवे॥ जय महालक्ष्मी माता, मैया जय महालक्ष्मी माता। तुमको निशदिन ध्यावत, योगी संत विधाता॥
सामान्य प्रश्न
प्र.महालक्ष्मी आरती गाने का सबसे अच्छा समय कब है?
शुक्रवार की संध्या पूजा सबसे शुभ समय है। दीवाली की रात, लक्ष्मी पंचमी और शरद पूर्णिमा विशेष रूप से प्रभावशाली हैं। अनेक भक्त सायंकाल दीप जलाने के बाद प्रतिदिन यह आरती गाते हैं।
प्र.लक्ष्मी आरती और महालक्ष्मी आरती में क्या अंतर है?
महालक्ष्मी आरती देवी के सर्वोच्च और सर्वव्यापी रूप — कोल्हापुर की महालक्ष्मी और अष्ट लक्ष्मी — को संबोधित करती है। यह भौतिक और आध्यात्मिक दोनों समृद्धियों पर जोर देती है, जबकि साधारण लक्ष्मी आरती मुख्यतः घरेलू धन पर केंद्रित होती है।
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