माँ महागौरी (अष्टम नवदुर्गा) · भक्ति गीत
महागौरी माता की आरती
Mahagauri Aarti
महागौरी आरती नवदुर्गा के आठवें स्वरूप माँ महागौरी की स्तुति है जो नवरात्रि के अष्टमी को पूजी जाती हैं। उनका नाम अत्यंत गौर वर्ण का संकेत देता है। वर्षों की कठोर तपस्या से उनका रंग श्यामल हो गया था जिसे भगवान शिव ने गंगा-स्नान से पुनः श्वेत-दीप्तिमान किया। वे श्वेत वृषभ पर सवार हैं और पवित्रता, शांति व क्षमा की प्रतीक हैं।
अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · पारंपरिक हिंदू भक्ति गीत
महागौरी माता की आरती के लाभ
- ·संचित पापों से मन, तन और आत्मा की शुद्धि
- ·विवाह-इच्छा की पूर्ति और दांपत्य-सुख का आशीर्वाद
- ·खोए स्वास्थ्य, सौंदर्य और जीवनशक्ति की पुनर्प्राप्ति
- ·मानसिक शांति, पूर्व-भूलों की क्षमा और नई आध्यात्मिक शुरुआत
पाठ का सर्वोत्तम समय
नवरात्रि की अष्टमी, सोमवार और प्रदोष व्रत के दिन।
महागौरी माता की आरती — संपूर्ण पाठ
॥ माँ महागौरी जी की आरती ॥
टेक
जय महागौरी माता जय महागौरी माता। श्वेत-वस्त्र-आभूषण, पाप-विनाशाता॥
॥ 1 ॥
गौर वर्ण माँ गौरी, वृषभ पर विराजे। त्रिशूल-डमरू धारे, जग में यश विराजे॥ जय महागौरी माता जय महागौरी माता। श्वेत-वस्त्र-आभूषण, पाप-विनाशाता॥
॥ 2 ॥
शिव ने गंगा से नहलाया, दिया रूप सुंदर। तप की महिमा दर्शाती, जग में तू मनोहर॥ जय महागौरी माता जय महागौरी माता। श्वेत-वस्त्र-आभूषण, पाप-विनाशाता॥
॥ 3 ॥
पाप हरो माँ गौरी, मन को निर्मल कर दो। नवरात्रि अष्टमी पर, भक्तों को तार दो॥ जय महागौरी माता जय महागौरी माता। श्वेत-वस्त्र-आभूषण, पाप-विनाशाता॥
सामान्य प्रश्न
प्र.महागौरी ने इतनी कठोर तपस्या क्यों की?
माँ पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए अत्यंत कठोर तपस्या की — शीतकाल में जल में खड़ी रहीं, ग्रीष्म में अग्नि में बैठीं और केवल गिरे हुए पत्तों पर जीवित रहीं। इस तपस्या से उनका रंग श्यामल हो गया। शिव ने भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें गंगा-जल से स्नान कराकर पुनः दीप्तिमान किया।
प्र.महागौरी के रूपांतरण का आध्यात्मिक संदेश क्या है?
महागौरी की कथा आत्मा की शुद्धि का प्रतीक है। तपस्या से श्यामल हुआ रूप कर्म-भार से दबी आत्मा का प्रतीक है और शिव-कृपा से मिली गौरता यह सिखाती है कि ईश्वरीय अनुग्रह से सभी पाप धुल सकते हैं और जीवन में नई शुरुआत सदा संभव है।
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