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भगवान श्री कृष्ण · भक्ति गीत

आरती कुंज बिहारी की

Aarti Kunj Bihari Ki

देवताभगवान श्री कृष्ण
प्रकारआरती (भक्ति गीत)
भाषाहिंदी (देवनागरी)

आरती कुंज बिहारी की श्री कृष्ण की सबसे प्रसिद्ध आरती है जो वृंदावन की कुंजों में उनकी दिव्य छटा का वर्णन करती है।

अंतिम अपडेट: 20 अप्रैल 2026 · पारंपरिक हिंदू भक्ति गीत

आरती कुंज बिहारी की के लाभ

  • ·हृदय में दिव्य प्रेम और आनंद
  • ·भक्ति के माध्यम से मुक्ति
  • ·मन की शांति
  • ·चिंता से राहत

पाठ का सर्वोत्तम समय

सुबह मंगला आरती, शाम संध्या आरती, जन्माष्टमी और हर बुधवार।

आरती कुंज बिहारी की — संपूर्ण पाठ

॥ आरती कुंज बिहारी की ॥

टेक

आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

1

गले में बैजंती माला, बजावत बंसी मधुर-बाला। श्रवण में कुंडल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला॥

सामान्य प्रश्न

प्र.कुंज बिहारी का अर्थ क्या है?

कुंज बिहारी का अर्थ है कुंजों में विहार करने वाले — यह श्री कृष्ण का नाम है जो वृंदावन के वनों में उनकी दिव्य लीलाओं को दर्शाता है।

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