केतु देव · भक्ति गीत
केतु जी की आरती
Ketu Aarti
केतु आरती केतु देव को समर्पित भक्ति-स्तुति है। वैदिक ज्योतिष में केतु मोक्ष, पूर्व-जन्म के कर्म, रहस्यवाद और आध्यात्मिक मुक्ति के कारक हैं। यह आरती केतु के प्रभाव को शांत करने, कर्म-ऋण को मुक्त करने और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होती है।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · पारंपरिक हिंदू भक्ति गीत
केतु जी की आरती के लाभ
- ·पूर्व-जन्म के कर्म-ऋण और केतु दोष से मुक्ति
- ·आध्यात्मिक विकास और भौतिकवाद से वैराग्य में वृद्धि
- ·अंतर्ज्ञान और गूढ़ ज्ञान में वृद्धि
- ·रहस्यमय रोगों, हानियों और एकाकीपन से सुरक्षा
पाठ का सर्वोत्तम समय
मंगलवार और शनिवार की शाम, केतु महादशा या अंतर्दशा के दौरान, और सूर्य या चंद्र ग्रहण के दिन।
केतु जी की आरती — संपूर्ण पाठ
॥ केतु जी की आरती ॥
टेक
जय केतु देव जय केतु देव, मोक्ष के दाता। ध्वज-चिह्न धारण करें, कर्म-विमोचन-त्राता॥
॥ 1 ॥
धूम्र वर्ण केतु देव, गृध्र पर विराजें। पूर्व-जन्म पाप हरो, भक्तों को सँवारें॥ जय केतु देव जय केतु देव, मोक्ष के दाता। ध्वज-चिह्न धारण करें, कर्म-विमोचन-त्राता॥
॥ 2 ॥
ज्ञान-वैराग्य दो प्रभु, मोह की बेड़ी काटो। माया के बंधन तोड़ो, मुक्ति का पथ दिखाओ॥ जय केतु देव जय केतु देव, मोक्ष के दाता। ध्वज-चिह्न धारण करें, कर्म-विमोचन-त्राता॥
॥ 3 ॥
जो शरण में आए तेरे, उसे तू संभालो। रोग-दोष दूर करो, जीवन-ज्योत जलाओ॥ जय केतु देव जय केतु देव, मोक्ष के दाता। ध्वज-चिह्न धारण करें, कर्म-विमोचन-त्राता॥
सामान्य प्रश्न
प्र.केतु को मोक्ष का ग्रह क्यों कहते हैं?
केतु आत्मा के पूर्व-जन्मों के संचित ज्ञान और अनसुलझे कर्मों का प्रतिनिधित्व करते हैं। राहु जहाँ सांसारिक इच्छाओं को बढ़ाते हैं, वहीं केतु भौतिक आसक्ति से दूर करके आध्यात्मिक मार्ग की ओर ले जाते हैं। सुदृढ़ स्थिति में केतु वैराग्य और मोक्ष की क्षमता प्रदान करते हैं।
प्र.केतु आरती और राहु आरती के उद्देश्य में क्या अंतर है?
राहु आरती महत्वाकांक्षा को नियंत्रित करने पर केंद्रित है जबकि केतु आरती कर्म-मुक्ति, वैराग्य और आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि के लिए है। केतु महादशा वालों और गूढ़ ज्ञान के साधकों के लिए यह आरती विशेष रूप से लाभकारी है।
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