श्री कार्तिकेय (मुरुगन / स्कंद) · भक्ति गीत
श्री कार्तिक स्वामी की आरती
Kartik Aarti (Kartikeya Aarti)
कार्तिक आरती शिव-पार्वती के पुत्र, देव-सेनापति, युद्ध, विजय और ज्ञान के देवता भगवान कार्तिकेय को समर्पित है। दक्षिण भारत में मुरुगन और संस्कृत ग्रंथों में स्कंद के नाम से जाने जाने वाले इन देवता की उपासना शक्ति, साहस और प्रतिस्पर्धा में सफलता के लिए की जाती है। स्कंद षष्ठी और कार्तिक मास उनकी उपासना के लिए विशेष पावन हैं।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · पारंपरिक हिंदू भक्ति गीत
श्री कार्तिक स्वामी की आरती के लाभ
- ·शत्रुओं पर विजय और प्रतिस्पर्धा में सफलता
- ·साहस, अनुशासन और नेतृत्व-गुणों का विकास
- ·दीर्घ रोगों से मुक्ति और स्वास्थ्य-लाभ
- ·बच्चों की रक्षा और पुत्र-प्राप्ति का आशीर्वाद
पाठ का सर्वोत्तम समय
स्कंद षष्ठी, कार्तिक पूर्णिमा, मंगलवार और शुक्रवार; कार्तिक मास में विशेष।
श्री कार्तिक स्वामी की आरती — संपूर्ण पाठ
॥ श्री कार्तिक स्वामी की आरती ॥
टेक
जय कार्तिक स्वामी, जय कार्तिक स्वामी। शिव-पार्वती-नंदन, देव-सेना के गामी॥
॥ 1 ॥
षण्मुख शक्तिधर स्वामी, मयूर पर सवारी। तारकासुर-संहारक, शक्ति तुम्हारी भारी॥ जय कार्तिक स्वामी, जय कार्तिक स्वामी। शिव-पार्वती-नंदन, देव-सेना के गामी॥
॥ 2 ॥
कृत्तिका-षट्-माताओं ने, बालक को पाला। स्कंद कुमार कहलाए, जग में उजियाला॥ जय कार्तिक स्वामी, जय कार्तिक स्वामी। शिव-पार्वती-नंदन, देव-सेना के गामी॥
॥ 3 ॥
रोग-शोक-भय हरते, विजय-पथ दिखाते। जो भक्त शरण आए, वे मुक्ति-फल पाते॥ जय कार्तिक स्वामी, जय कार्तिक स्वामी। शिव-पार्वती-नंदन, देव-सेना के गामी॥
सामान्य प्रश्न
प्र.कार्तिकेय, मुरुगन और स्कंद में क्या अंतर है?
ये एक ही देवता के विभिन्न क्षेत्रों और ग्रंथों में प्रचलित नाम हैं। कार्तिकेय उत्तर भारत का सबसे प्रचलित नाम है (कृत्तिका नक्षत्र की छह माताओं से जुड़ा)। मुरुगन प्रिय तमिल नाम है। स्कंद वैदिक/संस्कृत नाम है। सभी शिव-पार्वती के उसी पुत्र को इंगित करते हैं जो देव-सेनापति हैं।
प्र.स्कंद षष्ठी क्या है?
स्कंद षष्ठी तमिल महीने आइप्पासी (अक्तूबर-नवंबर) में मनाया जाने वाला छः दिवसीय पर्व है जो भगवान मुरुगन की असुर सूरपद्मन पर विजय का उत्सव है। भक्त छः दिन उपवास और गहन पूजन करते हैं। उत्तर भारत में शुक्ल षष्ठी भी कार्तिकेय उपासना के लिए शुभ मानी जाती है।
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