आज: वैदिक ज्योतिष · प्राचीन · सटीक · मुफ्त
खंड १ · अंक १ · स्था. MMXXVIशुक्रवार, 24 अप्रैल 2026मुफ्त · वैदिक · सटीक
VedicBirth
वैदिक ज्योतिष एवं ज्योतिष गणना

माँ कामाख्या देवी · भक्ति गीत

श्री कामाख्या देवी की आरती

Kamakhya Aarti

देवतामाँ कामाख्या देवी
प्रकारआरती (भक्ति गीत)
भाषाहिंदी (देवनागरी)

कामाख्या आरती असम के नीलाचल पर्वत पर स्थित सर्वाधिक शक्तिशाली शक्तिपीठ की अधिष्ठात्री देवी को समर्पित है। वे इच्छा, सृजन और आद्य स्त्री शक्ति की देवी हैं। ब्रह्मांड की समस्त सृजनात्मक और पुनर्जीवनदायी शक्ति की स्रोत मानी जाने वाली कामाख्या का मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहाँ सती का योनि-भाग गिरा था।

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · पारंपरिक हिंदू भक्ति गीत

श्री कामाख्या देवी की आरती के लाभ

  • ·गहरी इच्छाओं और मनोकामनाओं की पूर्ति
  • ·आंतरिक सृजनात्मक और आध्यात्मिक शक्ति (शक्ति) का जागरण
  • ·सभी कार्यों में विजय और शत्रु-नाश
  • ·प्रजनन-सुख, वैवाहिक मिलन और पारिवारिक सौहार्द का आशीर्वाद

पाठ का सर्वोत्तम समय

अम्बुवाची मेला (आषाढ़), नवरात्रि, और मंगलवार/शुक्रवार की संध्या।

श्री कामाख्या देवी की आरती — संपूर्ण पाठ

॥ श्री कामाख्या देवी की आरती ॥

टेक

जय कामाख्या माता, जय कामाख्या माता। नीलाचल की रानी, त्रिभुवन-सुखदाता॥

1

नीलाचल पर विराजें, तांत्रिक शक्ति महान। सती-पीठ की देवी, जग में सबसे महान॥ जय कामाख्या माता, जय कामाख्या माता। नीलाचल की रानी, त्रिभुवन-सुखदाता॥

2

कामेश्वरी कामदात्री, इच्छा-पूर्ण करने वाली। भक्तों के मन की माँ, मुराद सभी पाने वाली॥ जय कामाख्या माता, जय कामाख्या माता। नीलाचल की रानी, त्रिभुवन-सुखदाता॥

3

अम्बुवाची में आती, धरती हो जाती पावन। लाल वस्त्र धारण कर, करते दर्शन सावन॥ जय कामाख्या माता, जय कामाख्या माता। नीलाचल की रानी, त्रिभुवन-सुखदाता॥

सामान्य प्रश्न

प्र.कामाख्या मंदिर का क्या महत्व है?

गुवाहाटी, असम के नीलाचल पर्वत पर स्थित कामाख्या मंदिर 51 शक्तिपीठों में सबसे महत्वपूर्ण है — वे स्थान जहाँ विष्णु के सुदर्शन चक्र से विखंडित सती के अंग गिरे थे। कामाख्या वह स्थान है जहाँ सती का योनि-भाग गिरा, जो इसे तांत्रिक शक्ति उपासना का सर्वोच्च केंद्र बनाता है।

प्र.अम्बुवाची मेला क्या है?

अम्बुवाची मेला प्रत्येक वर्ष जून (आषाढ़) में मनाया जाता है जब ब्रह्मपुत्र नदी लाल हो जाती है — यह माँ कामाख्या के रजस्वला होने का प्रतीक है। मंदिर तीन दिन बंद रहता है और चौथे दिन भक्तों को लाल वस्त्र का पवित्र प्रसाद मिलता है। यह उत्सव स्त्री सृजन-शक्ति का उत्सव है और विश्व का सबसे बड़ा तांत्रिक समागम है।

अन्य आरतियाँ