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श्री गणपति देव · भक्ति गीत

जय गणपति देवा आरती

Jai Ganpati Deva Aarti

देवताश्री गणपति देव
प्रकारआरती (भक्ति गीत)
भाषाहिंदी (देवनागरी)

जय गणपति देवा महाराष्ट्र और गुजरात में अत्यंत लोकप्रिय गणेश आरती है। यह आरती गणपति को शिव-पार्वती के दिव्य पुत्र, बुद्धि और शुभारंभ के देव के रूप में स्तुत करती है।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · पारंपरिक हिंदू भक्ति गीत

जय गणपति देवा आरती के लाभ

  • ·हर नए उपक्रम की शुरुआत में आशीर्वाद
  • ·बाधाओं और मानसिक अवरोधों का निवारण
  • ·पढ़ाई, करियर और व्यापार में सफलता
  • ·पारिवारिक जीवन में सामंजस्य और शुभता

पाठ का सर्वोत्तम समय

बुधवार, चतुर्थी, गणेश चतुर्थी और किसी भी नए कार्य से पहले।

जय गणपति देवा आरती — संपूर्ण पाठ

॥ जय गणपति देवा आरती ॥

टेक

जय गणपति देवा, जय गणपति देवा। शिव-सुत मंगलमूरति, भव-भय-भंजन देवा॥

1

गजमुख गजगामी, गज-तुंड महाकाय। चतुर्भुज लंबोदर, विघ्नों के हर्ता राय॥ जय गणपति देवा, जय गणपति देवा। शिव-सुत मंगलमूरति, भव-भय-भंजन देवा॥

2

मोदक-प्रिय विनायक, सिद्धि-बुद्धि के दाता। दूर्वा-दल से पूजित, जग-जन के विधाता॥ जय गणपति देवा, जय गणपति देवा। शिव-सुत मंगलमूरति, भव-भय-भंजन देवा॥

3

प्रथम पूज्य तुम देवों में, ऋद्धि-सिद्धि के स्वामी। भक्त-जनों के रक्षक तुम, अंतर्यामी॥ जय गणपति देवा, जय गणपति देवा। शिव-सुत मंगलमूरति, भव-भय-भंजन देवा॥

सामान्य प्रश्न

प्र.जय गणेश आरती और जय गणपति देवा आरती में क्या अंतर है?

जय गणेश आरती सर्वभारतीय शास्त्रीय रूप है, जबकि जय गणपति देवा महाराष्ट्र और गुजरात में लोकप्रिय क्षेत्रीय संस्करण है। दोनों एक ही देवता का आह्वान करती हैं और समान भक्ति-फल देती हैं।

प्र.क्या यह आरती गणेश चतुर्थी पर गाई जा सकती है?

हाँ, जय गणपति देवा आरती महाराष्ट्र में 10-दिवसीय गणेश चतुर्थी उत्सव के दौरान सुखकर्ता दुखहर्ता के साथ सुबह-शाम विशेष रूप से गाई जाती है।

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