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श्री हनुमान जी · भक्ति गीत

हनुमान बाहुक आरती

Hanuman Bahuk Aarti

देवताश्री हनुमान जी
प्रकारआरती (भक्ति गीत)
भाषाहिंदी (देवनागरी)

हनुमान बाहुक आरती गोस्वामी तुलसीदास की रचना हनुमान बाहुक पर आधारित है, जो उन्होंने भुजाओं के असह्य दर्द से पीड़ित होने पर लिखी थी। तुलसीदास ने इस स्तुति से हनुमान जी की कृपा माँगी और चमत्कारिक रूप से रोगमुक्त हो गए। यह आरती शारीरिक रोग — विशेषकर भुजा और कंधे के दर्द — से मुक्ति के लिए गाई जाती है।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · पारंपरिक हिंदू भक्ति गीत

हनुमान बाहुक आरती के लाभ

  • ·शारीरिक रोगों — विशेषकर भुजा और कंधे के दर्द — से मुक्ति
  • ·हनुमान जी की उपचारक और रक्षात्मक कृपा
  • ·कष्ट के समय शक्ति और साहस
  • ·तुलसीदास की भक्ति-रचना का आध्यात्मिक पुण्य

पाठ का सर्वोत्तम समय

मंगलवार और शनिवार, हनुमान जयंती, और शारीरिक रोग या दर्द से पीड़ित व्यक्तियों के लिए।

हनुमान बाहुक आरती — संपूर्ण पाठ

॥ हनुमान बाहुक आरती ॥

टेक

जय हनुमान बाहुक बलवाना। तुलसीदास के रोग-निवारण, संकट-हरण महाना॥

1

बाहु-पीड़ा हर लेने वाले, रुद्र-अवतार। केसरी-नंदन वायु-पुत्र, भक्तों के आधार॥ जय हनुमान बाहुक बलवाना। तुलसीदास के रोग-निवारण, संकट-हरण महाना॥

2

तुलसी ने जब दर्द में तुम्हें पुकारा। तुमने भक्त की पीड़ा का उर से निवारा॥ जय हनुमान बाहुक बलवाना। तुलसीदास के रोग-निवारण, संकट-हरण महाना॥

3

रोगी जो गावे यह आरती मन लाय। हनुमत कृपा से भव-बाधा दूर हो जाय॥ जय हनुमान बाहुक बलवाना। तुलसीदास के रोग-निवारण, संकट-हरण महाना॥

सामान्य प्रश्न

प्र.हनुमान बाहुक क्या है और इसकी रचना किसने की?

हनुमान बाहुक गोस्वामी तुलसीदास (रामचरितमानस के रचयिता) की भक्ति-कविता है, जो उन्होंने भुजाओं (बाहुक) में असह्य पीड़ा होने पर लिखी थी। परंपरा के अनुसार, पूर्ण श्रद्धा से इस प्रार्थना की रचना और पाठ के बाद तुलसीदास चमत्कारिक रूप से रोगमुक्त हो गए। इसमें विभिन्न छंदों में 44 पद हैं।

प्र.क्या हनुमान बाहुक आरती स्वास्थ्य समस्याओं में सहायक हो सकती है?

भक्ति-परंपरा में हनुमान बाहुक आरती शारीरिक रोगों — विशेषकर मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द, लकवा और दीर्घकालिक बीमारी — से राहत के लिए पढ़ी जाती है। मंगलवार और शनिवार को सच्चे भाव से पाठ करने पर हनुमान जी की उपचारक कृपा मिलती है।

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