श्री गोपाल (बाल कृष्ण) · भक्ति गीत
गोपाल आरती
Gopala Aarti
गोपाल आरती भगवान कृष्ण के शिशु और बाल रूप — वृंदावन के गोपाल — की उपासना करती है। यह कोमल, प्रेममयी आरती कृष्ण की दिव्य बाल-लीलाओं — माखन-चोरी, गोप-गोपियों के साथ खेल और एक अप्रतिरोध्य बालक में छिपे ब्रह्मांडीय रूप — का उत्सव मनाती है।
अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · पारंपरिक हिंदू भक्ति गीत
गोपाल आरती के लाभ
- ·बच्चों के स्वास्थ्य, सुख और विकास का आशीर्वाद
- ·शुद्ध, निर्दोष भक्ति (वात्सल्य भाव) का विकास
- ·घर में कृष्ण की आनंदमयी ऊर्जा का आगमन
- ·नए माता-पिता और संतान-इच्छुक दंपतियों के लिए विशेष लाभकारी
पाठ का सर्वोत्तम समय
जन्माष्टमी, वैष्णव घरों में प्रतिदिन सूर्योदय पर, और प्रत्येक माह रोहिणी नक्षत्र के दिन।
गोपाल आरती — संपूर्ण पाठ
॥ श्री गोपाल आरती ॥
टेक
जय जय गोपाल, जय बाल गोपाल। यशोदा के नंदन, वृंदावन के लाल॥
॥ 1 ॥
माखन-मिश्री खाते, मटकी फोड़ जाते। गोपियों के मन में, नटखट मुस्काते॥ जय जय गोपाल, जय बाल गोपाल। यशोदा के नंदन, वृंदावन के लाल॥
॥ 2 ॥
गाय चराते वन में, बंसी बजाते। ब्रज-धूल में खेलें, जग को लुभाते॥ जय जय गोपाल, जय बाल गोपाल। यशोदा के नंदन, वृंदावन के लाल॥
॥ 3 ॥
बाल-रूप में छिपा है, ब्रह्मांड विशाल। भक्त-जन झाँकते उस, परम-ज्योति लाल॥ जय जय गोपाल, जय बाल गोपाल। यशोदा के नंदन, वृंदावन के लाल॥
सामान्य प्रश्न
प्र.गोपाल रूप में कृष्ण की पूजा अन्य रूपों से कैसे भिन्न है?
गोपाल कृष्ण का कोमल शिशु-बाल रूप है — वृंदावन के ग्वालों का प्रिय और यशोदा का लाल। गोपाल रूप की पूजा वात्सल्य भाव (ईश्वर के प्रति माता-पिता का प्रेम) विकसित करती है, जो भक्ति परंपरा में पाँच सर्वोच्च भक्ति-भावों में से एक है।
प्र.क्या गोपाल आरती जन्माष्टमी के लिए उपयुक्त है?
हाँ, जन्माष्टमी की मध्यरात्रि — कृष्ण जन्म के क्षण — पर गोपाल आरती सबसे प्रिय आरतियों में से एक है। वृंदावन, मथुरा और पूरे भारत में मंदिर और घर इस क्षण उत्सव में डूब जाते हैं, और गोपाल आरती इस समारोह का केंद्र होती है।
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