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खंड १ · अंक १ · स्था. MMXXVIशुक्रवार, 24 अप्रैल 2026मुफ्त · वैदिक · सटीक
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माँ गंगा (हरिद्वार) · भक्ति गीत

गंगा मैया आरती (हरिद्वार)

Ganga Maiya Aarti (Haridwar)

देवतामाँ गंगा (हरिद्वार)
प्रकारआरती (भक्ति गीत)
भाषाहिंदी (देवनागरी)

गंगा मैया आरती हरिद्वार के हर की पौड़ी घाट पर होने वाली भव्य सायंकालीन आरती है — हिंदू धर्म के सर्वाधिक दर्शनीय और आध्यात्मिक रूप से ऊर्जावान अनुष्ठानों में से एक। पुजारी बड़े बहु-स्तरीय दीपकों के साथ समन्वित आरती करते हैं, जबकि घंटियाँ, शंख और मंत्र-ध्वनि गूँजती है।

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · पारंपरिक हिंदू भक्ति गीत

गंगा मैया आरती (हरिद्वार) के लाभ

  • ·पापों और नकारात्मक कर्मों का शुद्धीकरण
  • ·माँ गंगा का मोक्ष-आशीर्वाद
  • ·पावन नदी की ऊर्जा से उपचार और नवीनीकरण
  • ·पवित्र गंगा में की गई मनोकामनाओं की पूर्ति

पाठ का सर्वोत्तम समय

प्रतिदिन सूर्यास्त पर (हर की पौड़ी घाट, हरिद्वार)। गंगा दशहरा, मकर संक्रांति और कुंभ मेले पर भी।

गंगा मैया आरती (हरिद्वार) — संपूर्ण पाठ

॥ गंगा मैया आरती ॥

टेक

जय गंगा मैया, जय गंगे माता। हर की पौड़ी सोहे, दीप-ज्योति-दाता॥

1

हिमालय से उतरीं तुम, शिव-जटा से आई। भागीरथी की तपस्या, धरती पर समाई॥ जय गंगा मैया, जय गंगे माता। हर की पौड़ी सोहे, दीप-ज्योति-दाता॥

2

स्नान करे जो तुझमें, पाप-मुक्त होवे। मृत्यु के बाद भी जो, तेरे तट पर सोवे॥ जय गंगा मैया, जय गंगे माता। हर की पौड़ी सोहे, दीप-ज्योति-दाता॥

3

दीप-थाल लेकर पुजारी, आरती उतारें। लाखों दीप-दान से, तट को दमकारें॥ जय गंगा मैया, जय गंगे माता। हर की पौड़ी सोहे, दीप-ज्योति-दाता॥

4

हरिद्वार की पावन माटी, जन-मन को भावे। गंगा मैया की आरती, मोक्ष-पथ दिखावे॥ जय गंगा मैया, जय गंगे माता। हर की पौड़ी सोहे, दीप-ज्योति-दाता॥

सामान्य प्रश्न

प्र.हरिद्वार की गंगा आरती क्या है और यह अन्य गंगा आरतियों से कैसे भिन्न है?

हर की पौड़ी पर हरिद्वार गंगा आरती सभी गंगा आरतियों में सबसे प्रसिद्ध और भव्य है — प्रतिदिन संध्या को प्रशिक्षित पुजारियों द्वारा आयोजित। वाराणसी के दशाश्वमेध घाट या ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट की आरती से यह अधिक विस्तृत और दर्शनीय है। दीप-दान और समन्वित आरती का दृश्य अद्वितीय है।

प्र.गंगा आरती में दीप अर्पित करने का आध्यात्मिक महत्व क्या है?

आरती के दौरान माँ गंगा को तैरता दीपक (दीपदान) अर्पित करने से मनोकामनाएँ सीधे माँ तक पहुँचती हैं। प्रकाश आत्मा की यात्रा का प्रतीक है और नदी में दीप छोड़ना अहंकार और कर्म का ईश्वर को समर्पण है। यह पितृ-तर्पण का भी एक प्राचीन रूप है।

अन्य आरतियाँ