माँ काली, दक्षिणेश्वर मंदिर, कोलकाता · भक्ति गीत
दक्षिणेश्वर काली आरती
Dakshineswar Kali Aarti
दक्षिणेश्वर काली आरती कोलकाता के दक्षिणेश्वर काली मंदिर में गाई जाने वाली पवित्र भक्ति-स्तुति है — वह मंदिर जहाँ श्री रामकृष्ण परमहंस ने पुजारी के रूप में सेवा की और माँ काली का साक्षात्कार किया। यह आरती बंगाली भक्ति-परंपरा और माँ काली के उग्र-मातृस्वरूप को एकत्र करती है।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · पारंपरिक हिंदू भक्ति गीत
दक्षिणेश्वर काली आरती के लाभ
- ·भय, अहंकार और आसक्ति से मुक्ति
- ·आंतरिक अंधकार और अज्ञान का नाश
- ·सभी प्रकार की बुराई और नकारात्मकता से सुरक्षा
- ·आध्यात्मिक जागरण के लिए जगत माता की कृपा
पाठ का सर्वोत्तम समय
काली पूजा (दिवाली रात), नवरात्रि, मंगलवार और अमावस्या।
दक्षिणेश्वर काली आरती — संपूर्ण पाठ
॥ दक्षिणेश्वर काली आरती ॥
टेक
जय काली दक्षिणेश्वरी माँ, जय महाकाली। श्यामा तेरी ज्योति जले, तम-हर्ता काली॥
॥ 1 ॥
नील-वर्णा नग्न-पादा, मुंडमाल धारी। शव पर नृत्य करती माँ, चतुर्भुज कारी॥ जय काली दक्षिणेश्वरी माँ, जय महाकाली। श्यामा तेरी ज्योति जले, तम-हर्ता काली॥
॥ 2 ॥
रामकृष्ण के ह्रदय में, तूने वास किया। दक्षिणेश्वर-घाट पर, दर्शन दिया॥ जय काली दक्षिणेश्वरी माँ, जय महाकाली। श्यामा तेरी ज्योति जले, तम-हर्ता काली॥
॥ 3 ॥
भक्त के भय को हर माँ, अभय-दान दे। तेरे चरणों में जीवन, मोक्ष-वरदान दे॥ जय काली दक्षिणेश्वरी माँ, जय महाकाली। श्यामा तेरी ज्योति जले, तम-हर्ता काली॥
सामान्य प्रश्न
प्र.दक्षिणेश्वर काली मंदिर और श्री रामकृष्ण का क्या संबंध है?
श्री रामकृष्ण परमहंस (1836–1886) ने दक्षिणेश्वर काली मंदिर में कई वर्षों तक मुख्य पुजारी के रूप में सेवा की। उन्हें माँ काली के साक्षात दर्शन हुए और वे उन्हें जीवंत जगत माता मानते थे। उनके आध्यात्मिक अनुभव रामकृष्ण मिशन की नींव बने।
प्र.दक्षिणेश्वर काली आरती सामान्य काली आरती से कैसे भिन्न है?
दक्षिणेश्वर काली आरती बंगाल की शाक्त-उपासना परंपरा को वहन करती है। यह काली के उग्र रूप के साथ-साथ उनके मातृस्नेही और करुणामय पक्ष को उजागर करती है — श्री रामकृष्ण की शिक्षा के अनुसार कि काली केवल संहारक नहीं, बल्कि सर्वाधिक स्नेहिल माँ भी हैं।
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