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खंड १ · अंक १ · स्था. MMXXVIशुक्रवार, 24 अप्रैल 2026मुफ्त · वैदिक · सटीक
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वैदिक ज्योतिष एवं ज्योतिष गणना

चंद्र देव · भक्ति गीत

चंद्र आरती

Chandra Aarti

देवताचंद्र देव
प्रकारआरती (भक्ति गीत)
भाषाहिंदी (देवनागरी)

चंद्र आरती चंद्र देव को समर्पित भक्ति स्तुति है, जो मन, भावनाओं और जीवन की लय को नियंत्रित करते हैं। सोमवार और पूर्णिमा की रात गाई जाने वाली यह आरती मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और स्पष्टता प्रदान करती है।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · पारंपरिक हिंदू भक्ति गीत

चंद्र आरती के लाभ

  • ·मानसिक शांति और चिंता से मुक्ति
  • ·भावनात्मक स्थिरता और मानसिक स्पष्टता
  • ·जन्म कुंडली में चंद्र को बल
  • ·माता, घर और पारिवारिक सद्भाव का आशीर्वाद

पाठ का सर्वोत्तम समय

प्रत्येक सोमवार, पूर्णिमा और करवा चौथ की संध्या पर।

चंद्र आरती — संपूर्ण पाठ

॥ श्री चंद्र देव की आरती ॥

टेक

जय चंद्र देवा, जय चंद्र देवा। शीतल ज्योति फैलाओ, जग को सुख दो देवा॥

1

श्वेत वर्ण तुम सोहत, श्वेत वस्त्र धारी। सोलह कला संपूर्ण, शशि सुखकारी॥ जय चंद्र देवा, जय चंद्र देवा। शीतल ज्योति फैलाओ, जग को सुख दो देवा॥

2

रोहिणी प्रिय तुम्हारी, नक्षत्र-राज कहाते। सागर को थामे हो तुम, भूमि को शीतलाते॥ जय चंद्र देवा, जय चंद्र देवा। शीतल ज्योति फैलाओ, जग को सुख दो देवा॥

3

मन के स्वामी तुम हो, मन को करो स्थिर। भक्तों का कल्याण करो, हे चंद्र मतिधीर॥ जय चंद्र देवा, जय चंद्र देवा। शीतल ज्योति फैलाओ, जग को सुख दो देवा॥

सामान्य प्रश्न

प्र.पूर्णिमा पर चंद्र आरती का क्या महत्व है?

पूर्णिमा पर चंद्रमा की ऊर्जा अपने चरम पर होती है। इस रात चंद्र आरती करने से मन और भावनाओं पर चंद्रमा का शीतल प्रभाव अधिकतम होता है और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

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