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देव गुरु बृहस्पति · भक्ति गीत

बृहस्पति आरती

Brihaspati Aarti

देवतादेव गुरु बृहस्पति
प्रकारआरती (भक्ति गीत)
भाषाहिंदी (देवनागरी)

बृहस्पति आरती देव गुरु बृहस्पति को समर्पित भक्ति प्रार्थना है, जो देवताओं के गुरु और बृहस्पति ग्रह के अधिपति हैं। गुरुवार को गाई जाने वाली यह आरती ज्ञान, समृद्धि और आध्यात्मिक मार्गदर्शन का आशीर्वाद माँगती है।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · पारंपरिक हिंदू भक्ति गीत

बृहस्पति आरती के लाभ

  • ·ज्ञान, बुद्धि और विद्या में वृद्धि
  • ·शिक्षा और करियर में बाधाओं का निवारण
  • ·विवाह, संतान और पारिवारिक समृद्धि का आशीर्वाद
  • ·जन्म कुंडली में गुरु ग्रह को बल प्रदान करना

पाठ का सर्वोत्तम समय

प्रत्येक गुरुवार, गुरु होरा में और गुरु पूर्णिमा पर।

बृहस्पति आरती — संपूर्ण पाठ

॥ श्री बृहस्पति जी की आरती ॥

टेक

जय बृहस्पति देवा, ॐ जय बृहस्पति देवा। छिन छिन भोग लगाओ, कद्दू तुम्हें चढ़ाओ देवा॥

1

तुम हो देव गुरु ज्ञानी, सुर-मुनि शिर धारी। देव दानव नमें तुमको, विश्व के सुखकारी॥ जय बृहस्पति देवा, ॐ जय बृहस्पति देवा। छिन छिन भोग लगाओ, कद्दू तुम्हें चढ़ाओ देवा॥

2

वेद पुराण विशारद, सब विद्या के दाता। ज्ञान ध्यान को दीजे, दीन जनों के त्राता॥ जय बृहस्पति देवा, ॐ जय बृहस्पति देवा। छिन छिन भोग लगाओ, कद्दू तुम्हें चढ़ाओ देवा॥

3

पीत वस्त्र पीत पुष्प, पीत सुमन प्यारे। गुरुवार को पूजन करें, भक्त सुख पाने वारे॥ जय बृहस्पति देवा, ॐ जय बृहस्पति देवा। छिन छिन भोग लगाओ, कद्दू तुम्हें चढ़ाओ देवा॥

सामान्य प्रश्न

प्र.बृहस्पति आरती गुरुवार को क्यों गाते हैं?

गुरुवार को गुरुवार कहते हैं — यह देव गुरु बृहस्पति का दिन है। इस दिन पूजन से जन्म कुंडली में गुरु ग्रह बलवान होता है, जिससे ज्ञान, समृद्धि और आध्यात्मिक मार्गदर्शन की प्राप्ति होती है।

प्र.बृहस्पति पूजा में क्या अर्पित करें?

गुरुवार को बृहस्पति जी को पीले फूल, पीले फल (विशेषकर केला), चना दाल, हल्दी और पीला वस्त्र चढ़ाना शुभ माना जाता है।

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