अग्नि देव (यज्ञ अग्नि) · भक्ति गीत
अग्नि देव आरती
Agni Dev Aarti
अग्नि देव आरती अग्नि देव की स्तुति करती है — पवित्र अग्नि देवता, दिव्य दूत जो मानव लोक से देवों तक आहुतियाँ पहुँचाते हैं। सबसे महत्वपूर्ण वैदिक देवताओं में से एक के रूप में, अग्नि प्रत्येक यज्ञ, हवन और पवित्र अग्नि अनुष्ठान में उपस्थित हैं। वे देवों के पुरोहित और पुरोहितों के देव हैं।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · पारंपरिक हिंदू भक्ति गीत
अग्नि देव आरती के लाभ
- ·अग्नि अनुष्ठान से शरीर, मन और परिवेश का शुद्धीकरण
- ·यज्ञ आहुतियों के माध्यम से दिव्य से सीधा संपर्क
- ·पवित्र अग्नि से नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा
- ·नई शुरुआतों — विवाह, गृह-प्रवेश, नए उपक्रमों — के लिए आशीर्वाद
पाठ का सर्वोत्तम समय
किसी भी हवन या यज्ञ, अग्नि पूजा, होलिका दहन, विवाह समारोह और गृह-प्रवेश के दौरान।
अग्नि देव आरती — संपूर्ण पाठ
॥ अग्नि देव आरती ॥
टेक
जय अग्नि देव, जय यज्ञ-देवा। पावन-शिखा के दाता, ब्रह्मांड-सेवा॥
॥ 1 ॥
ऋग्वेद के प्रथम-मंत्र, अग्नि को गाते। सप्त-जिह्वा से देव, आहुति खाते॥ जय अग्नि देव, जय यज्ञ-देवा। पावन-शिखा के दाता, ब्रह्मांड-सेवा॥
॥ 2 ॥
देव और मानव के, दूत-मध्यस्थ। यज्ञ की आहुति लेकर, स्वर्ग में प्रशस्थ॥ जय अग्नि देव, जय यज्ञ-देवा। पावन-शिखा के दाता, ब्रह्मांड-सेवा॥
॥ 3 ॥
सप्तपदी के साक्षी, विवाह-होम के। गृह-प्रवेश-हवन में, रक्षक-धोम के॥ जय अग्नि देव, जय यज्ञ-देवा। पावन-शिखा के दाता, ब्रह्मांड-सेवा॥
सामान्य प्रश्न
प्र.वैदिक अनुष्ठानों में अग्नि देव इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं?
अग्नि ऋग्वेद में सर्वाधिक उल्लिखित देवताओं में से एक हैं — ऋग्वेद का प्रथम श्लोक "अग्निमीले..." से प्रारंभ होता है। वे मानवों और देवों के बीच दिव्य मध्यस्थ हैं। प्रत्येक पवित्र हिंदू अनुष्ठान — विवाह, दाह-संस्कार, हवन, यज्ञ, गृह-प्रवेश — में पवित्र अग्नि और इसलिए अग्नि देव की उपस्थिति होती है।
प्र.हिंदू विवाह में अग्नि देव का क्या महत्व है?
हिंदू विवाह में अग्नि देव विवाह-वचनों के पवित्र साक्षी (साक्षी) हैं। सप्तपदी (पवित्र अग्नि के चारों ओर सात कदम) और फेरे (अग्नि की परिक्रमा) केंद्रीय अनुष्ठान हैं जो दंपति को कानूनी और आध्यात्मिक रूप से बाँधते हैं। अग्नि देव दिव्य साक्षी हैं, इसलिए विवाह को स्वयं ईश्वर का साक्षी माना जाता है।
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