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पवित्र पाठ — वैदिक पूजा विधि

विष्णु सहस्रनाम पाठ

देवता भगवान विष्णु
अवधि 30–45 मिनट (एकल पाठ)
श्रेणी पवित्र पाठ

संक्षिप्त परिचय

विष्णु सहस्रनाम पाठ महाभारत के अनुशासन पर्व से भगवान विष्णु के हजार दिव्य नामों का पठन है। भीष्म ने शरशय्या पर लेटे हुए ये नाम युधिष्ठिर को प्रदान किए थे। प्रत्येक नाम विष्णु — पालनकर्ता और सर्वव्यापी सत्य — के एक ब्रह्मांडीय गुण को दर्शाता है। वैष्णव धर्म में सबसे महान स्तोत्रों में से एक माना जाने वाला यह पाठ सुरक्षा, शांति और दिव्य अनुग्रह के लिए हिंदू घरों में प्रतिदिन किया जाता है।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

सभी खतरों और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है, स्वास्थ्य और दीर्घायु प्राप्त होती है, पाप और बुरे कर्म दूर होते हैं, घर में शांति और समृद्धि आती है, शत्रुओं पर विजय मिलती है, और भक्तिपूर्वक पाठ से सभी वैदिक यज्ञों के समान पुण्य मिलता है।

चरण-दर-चरण विधि

स्नान करें और स्वच्छ पीले या सफेद वस्त्र पहनें। स्वच्छ आसन पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें। विष्णु प्रतिमा या शालिग्राम रखें। घी दीपक जलाएं और तुलसी पत्ते, पीले फूल और पंचामृत चढ़ाएं। प्रत्येक नाम के अर्थ पर विचार करते हुए भक्तिभाव से विष्णु सहस्रनाम का पठन करें। अंत में आरती करें।

शुभ मुहूर्त

एकादशी, गुरुवार, शनिवार और पूर्णिमा। ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल) सबसे शुभ है। किसी भी समय प्रतिदिन पढ़ा जा सकता है।

आवश्यक सामग्री

  • ·विष्णु प्रतिमा या शालिग्राम
  • ·तुलसी पत्ते
  • ·पीले फूल
  • ·घी का दीपक
  • ·अगरबत्ती
  • ·पंचामृत सामग्री
  • ·चंदन का लेप
  • ·विष्णु सहस्रनाम पुस्तक
  • ·फल
  • ·कपूर

सामान्य प्रश्न

प्र.विष्णु सहस्रनाम पाठ क्या है?

विष्णु सहस्रनाम पाठ महाभारत के अनुशासन पर्व से भगवान विष्णु के हजार दिव्य नामों का पठन है। भीष्म ने शरशय्या पर लेटे हुए ये नाम युधिष्ठिर को प्रदान किए थे। प्रत्येक नाम विष्णु — पालनकर्ता और सर्वव्यापी सत्य — के एक ब्रह्मांडीय गुण को दर्शाता है। वैष्ण...

प्र.विष्णु सहस्रनाम पाठ के क्या लाभ हैं?

सभी खतरों और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है, स्वास्थ्य और दीर्घायु प्राप्त होती है, पाप और बुरे कर्म दूर होते हैं, घर में शांति और समृद्धि आती है, शत्रुओं पर विजय मिलती है, और भक्तिपूर्वक पाठ से सभी वैदिक यज्ञों के समान पुण्य मिलता है।

प्र.विष्णु सहस्रनाम पाठ का सबसे अच्छा समय क्या है?

एकादशी, गुरुवार, शनिवार और पूर्णिमा। ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल) सबसे शुभ है। किसी भी समय प्रतिदिन पढ़ा जा सकता है।

प्र.विष्णु सहस्रनाम पाठ के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

विष्णु प्रतिमा या शालिग्राम, तुलसी पत्ते, पीले फूल, घी का दीपक, अगरबत्ती, पंचामृत सामग्री, चंदन का लेप, विष्णु सहस्रनाम पुस्तक, फल, कपूर।

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