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पवित्र पाठ — वैदिक पूजा विधि

ललिता सहस्रनाम पाठ

देवता देवी ललिता त्रिपुरसुंदरी
अवधि 45–60 मिनट (एकल पाठ)
श्रेणी पवित्र पाठ

संक्षिप्त परिचय

ललिता सहस्रनाम पाठ देवी ललिता त्रिपुरसुंदरी — शक्ति के सर्वोच्च स्वरूप — के हजार नामों (सहस्रनाम) का भक्ति पठन है। ब्रह्माण्ड पुराण से उद्धृत ये नाम वाग्देवताओं द्वारा ऋषि अगस्त्य को प्रकट किए गए थे। प्रत्येक नाम दिव्य माता के एक पहलू का वर्णन करता है। यह ग्रंथ शाक्त परंपरा में सबसे गूढ़ और शक्तिशाली माना जाता है।

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

दिव्य माता का आशीर्वाद जीवन के सभी पहलुओं में मिलता है, सौंदर्य, बुद्धि और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त होता है, सभी दोष दूर होते हैं, वैवाहिक सद्भाव और संतान सुख मिलता है, अनेक जन्मों के पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

चरण-दर-चरण विधि

स्नान से शुद्धि करें। लाल आसन पर पूर्व की ओर मुख करके बैठें। ललिता प्रतिमा या श्री चक्र यंत्र के सामने घी दीपक और अगरबत्ती जलाएं। लाल फूल, कुमकुम और शहद अर्पित करें। ललिता सहस्रनाम का प्रत्येक नाम के अर्थ पर ध्यान करते हुए धीरे पठन करें। देवी आरती से समाप्त करें। शुक्रवार नियमित अभ्यास के लिए सबसे शुभ दिन है।

शुभ मुहूर्त

शुक्रवार, नवरात्रि, पूर्णिमा और अष्टमी। दैनिक पठन के लिए स्नान के बाद प्रातःकाल आदर्श है।

आवश्यक सामग्री

  • ·ललिता प्रतिमा या श्री चक्र यंत्र
  • ·लाल फूल (गुलाब या गुड़हल)
  • ·कुमकुम
  • ·घी का दीपक
  • ·अगरबत्ती
  • ·शहद
  • ·लाल वस्त्र
  • ·ललिता सहस्रनाम पुस्तक
  • ·फल
  • ·कपूर

सामान्य प्रश्न

प्र.ललिता सहस्रनाम पाठ क्या है?

ललिता सहस्रनाम पाठ देवी ललिता त्रिपुरसुंदरी — शक्ति के सर्वोच्च स्वरूप — के हजार नामों (सहस्रनाम) का भक्ति पठन है। ब्रह्माण्ड पुराण से उद्धृत ये नाम वाग्देवताओं द्वारा ऋषि अगस्त्य को प्रकट किए गए थे। प्रत्येक नाम दिव्य माता के एक पहलू का वर्णन करता ह...

प्र.ललिता सहस्रनाम पाठ के क्या लाभ हैं?

दिव्य माता का आशीर्वाद जीवन के सभी पहलुओं में मिलता है, सौंदर्य, बुद्धि और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त होता है, सभी दोष दूर होते हैं, वैवाहिक सद्भाव और संतान सुख मिलता है, अनेक जन्मों के पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

प्र.ललिता सहस्रनाम पाठ का सबसे अच्छा समय क्या है?

शुक्रवार, नवरात्रि, पूर्णिमा और अष्टमी। दैनिक पठन के लिए स्नान के बाद प्रातःकाल आदर्श है।

प्र.ललिता सहस्रनाम पाठ के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

ललिता प्रतिमा या श्री चक्र यंत्र, लाल फूल (गुलाब या गुड़हल), कुमकुम, घी का दीपक, अगरबत्ती, शहद, लाल वस्त्र, ललिता सहस्रनाम पुस्तक, फल, कपूर।

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