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पवित्र पाठ — वैदिक पूजा विधि

सुंदरकांड पाठ

देवता भगवान हनुमान, भगवान राम
अवधि 2–3 घंटे
श्रेणी पवित्र पाठ

संक्षिप्त परिचय

सुंदरकांड पाठ वाल्मीकि रामायण के पाँचवें अध्याय (कांड) का पाठ है, जिसमें हनुमान की लंका यात्रा, सीता से भेंट और विजयी वापसी का वर्णन है। यह रामायण का सबसे आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली अध्याय माना जाता है जो बाधाएं दूर करता है, विजय दिलाता है और हनुमान जी का प्रत्यक्ष आशीर्वाद देता है।

अंतिम अपडेट: 19 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

सभी बाधाएं और शत्रु दूर होते हैं, कठिन परिस्थितियों में विजय मिलती है, भय और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, रोगों से मुक्ति, न्यायालय के मामलों में सफलता मिलती है।

चरण-दर-चरण विधि

गणेश पूजा से शुरू करें। घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं। हनुमान प्रतिमा रखें। हनुमान आवाहन मंत्र से शुरू करें। भक्तिपूर्वक सुंदरकांड के सभी 68 श्लोकों का पाठ करें। हनुमान चालीसा और आरती से समाप्त करें।

शुभ मुहूर्त

मंगलवार या शनिवार। ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल। किसी बड़ी बाधा का सामना करते समय।

आवश्यक सामग्री

  • ·सुंदरकांड पुस्तक
  • ·हनुमान प्रतिमा या चित्र
  • ·केसर
  • ·लाल फूल
  • ·घी का दीपक
  • ·अगरबत्ती
  • ·प्रसाद (लड्डू या केला)

सामान्य प्रश्न

प्र.सुंदरकांड पाठ क्या है?

सुंदरकांड पाठ वाल्मीकि रामायण के पाँचवें अध्याय (कांड) का पाठ है, जिसमें हनुमान की लंका यात्रा, सीता से भेंट और विजयी वापसी का वर्णन है। यह रामायण का सबसे आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली अध्याय माना जाता है जो बाधाएं दूर करता है, विजय दिलाता है और हनुमान...

प्र.सुंदरकांड पाठ के क्या लाभ हैं?

सभी बाधाएं और शत्रु दूर होते हैं, कठिन परिस्थितियों में विजय मिलती है, भय और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, रोगों से मुक्ति, न्यायालय के मामलों में सफलता मिलती है।

प्र.सुंदरकांड पाठ का सबसे अच्छा समय क्या है?

मंगलवार या शनिवार। ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल। किसी बड़ी बाधा का सामना करते समय।

प्र.सुंदरकांड पाठ के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

सुंदरकांड पुस्तक, हनुमान प्रतिमा या चित्र, केसर, लाल फूल, घी का दीपक, अगरबत्ती, प्रसाद (लड्डू या केला)।

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