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वैदिक ज्योतिष एवं ज्योतिष गणना

पवित्र हवन — वैदिक पूजा विधि

वास्तु हवन

देवता वास्तु पुरुष एवं पंचभूत
अवधि 3–4 घंटे
श्रेणी पवित्र हवन

संक्षिप्त परिचय

वास्तु हवन वास्तु पुरुष (निवास के देवता) को प्रसन्न करने और किसी संपत्ति के पाँच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) में सामंजस्य स्थापित करने के लिए किया जाने वाला पवित्र अग्नि अनुष्ठान है। यह नए घर या कार्यालय में प्रवेश से पहले, बड़े नवीनीकरण के बाद या वास्तु दोषों को सुधारने के लिए किया जाता है। यह हवन स्थान को ऊर्जात्मक रूप से शुद्ध करता है और सकारात्मक ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं को आमंत्रित करता है।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

परिसर से वास्तु दोष और नकारात्मक ऊर्जाएं दूर होती हैं; सभी निवासियों के लिए शांति, समृद्धि और सद्भाव आता है; घर में स्वास्थ्य और रिश्तों में सुधार होता है; समृद्धि और सकारात्मक कंपन आकर्षित होते हैं; आध्यात्मिक रूप से सुरक्षित वातावरण बनता है।

चरण-दर-चरण विधि

हवन कुंड को संपत्ति के ब्रह्मस्थान (केंद्र) में रखें। पहले गणेश पूजा करें। वास्तु पुरुष और सभी आठ दिशाओं के देवताओं (अष्टदिक्पाल) का आवाहन करें। नवग्रह आहुति के बाद वास्तु मंत्रों से आहुति दें। सभी दिशाओं में पवित्र जल छिड़कें। पूर्णाहुति और (यदि प्रवेश हो तो) गृह प्रवेश अनुष्ठान के साथ समाप्त करें।

शुभ मुहूर्त

गृह प्रवेश से पहले, वैदिक ज्योतिषी द्वारा निर्धारित शुभ मुहूर्त पर, उत्तरायण (सूर्य की उत्तर दिशा में यात्रा) के दौरान, या पुष्य नक्षत्र के दिन। राहु काल के दौरान न करें।

आवश्यक सामग्री

  • ·हवन कुंड
  • ·आम और पलाश की लकड़ी
  • ·घी
  • ·नवग्रह जड़ी-बूटियां
  • ·तिल
  • ·जौ
  • ·सरसों के बीज
  • ·कपूर
  • ·गंगाजल
  • ·हल्दी
  • ·लाल और सफेद फूल
  • ·नारियल
  • ·पंच धान्य

सामान्य प्रश्न

प्र.वास्तु हवन क्या है?

वास्तु हवन वास्तु पुरुष (निवास के देवता) को प्रसन्न करने और किसी संपत्ति के पाँच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) में सामंजस्य स्थापित करने के लिए किया जाने वाला पवित्र अग्नि अनुष्ठान है। यह नए घर या कार्यालय में प्रवेश से पहले, बड़े नवीनीकरण...

प्र.वास्तु हवन के क्या लाभ हैं?

परिसर से वास्तु दोष और नकारात्मक ऊर्जाएं दूर होती हैं; सभी निवासियों के लिए शांति, समृद्धि और सद्भाव आता है; घर में स्वास्थ्य और रिश्तों में सुधार होता है; समृद्धि और सकारात्मक कंपन आकर्षित होते हैं; आध्यात्मिक रूप से सुरक्षित वातावरण बनता है।

प्र.वास्तु हवन का सबसे अच्छा समय क्या है?

गृह प्रवेश से पहले, वैदिक ज्योतिषी द्वारा निर्धारित शुभ मुहूर्त पर, उत्तरायण (सूर्य की उत्तर दिशा में यात्रा) के दौरान, या पुष्य नक्षत्र के दिन। राहु काल के दौरान न करें।

प्र.वास्तु हवन के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

हवन कुंड, आम और पलाश की लकड़ी, घी, नवग्रह जड़ी-बूटियां, तिल, जौ, सरसों के बीज, कपूर, गंगाजल, हल्दी, लाल और सफेद फूल, नारियल, पंच धान्य।

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