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पवित्र हवन — वैदिक पूजा विधि

महामृत्युंजय हवन

देवता भगवान शिव (त्र्यंबकेश्वर)
अवधि 3–6 घंटे
श्रेणी पवित्र हवन

संक्षिप्त परिचय

महामृत्युंजय हवन एक पवित्र अग्नि अनुष्ठान है जिसमें महामृत्युंजय मंत्र (ॐ त्र्यंबकं यजामहे) का 108, 1008 या 11,000 बार जाप करते हुए पवित्र अग्नि में घी, तिल और जड़ी-बूटियों की आहुति दी जाती है। यह गंभीर बीमारी, दुर्घटना, लंबे कष्ट और असामयिक मृत्यु के लिए सबसे शक्तिशाली वैदिक उपायों में से एक है।

अंतिम अपडेट: 19 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

असामयिक मृत्यु से रक्षा होती है, गंभीर और दीर्घकालिक बीमारियाँ ठीक होती हैं, मृत्यु और दुर्घटनाओं का भय दूर होता है, दीर्घायु और स्वस्थ जीवन मिलता है।

चरण-दर-चरण विधि

हवन कुंड स्थापित करें। गणेश पूजा करें। विशेष समिधा (बेल की लकड़ी) से पवित्र अग्नि प्रज्वलित करें। प्रत्येक मंत्र जाप के साथ घी, तिल, जौ और जड़ी-बूटियाँ डालें। 108/1008/11000 आहुतियाँ दें। पूर्णाहुति और प्रसाद वितरण से समाप्त करें।

शुभ मुहूर्त

सोमवार, प्रदोष, महाशिवरात्रि। या स्वास्थ्य संकट के समय। सुबह या शाम।

आवश्यक सामग्री

  • ·हवन कुंड
  • ·बेल की लकड़ी
  • ·घी
  • ·तिल
  • ·जौ
  • ·विशेष जड़ी-बूटियाँ
  • ·कपूर
  • ·अगरबत्ती
  • ·महामृत्युंजय यंत्र

सामान्य प्रश्न

प्र.महामृत्युंजय हवन क्या है?

महामृत्युंजय हवन एक पवित्र अग्नि अनुष्ठान है जिसमें महामृत्युंजय मंत्र (ॐ त्र्यंबकं यजामहे) का 108, 1008 या 11,000 बार जाप करते हुए पवित्र अग्नि में घी, तिल और जड़ी-बूटियों की आहुति दी जाती है। यह गंभीर बीमारी, दुर्घटना, लंबे कष्ट और असामयिक मृत्यु क...

प्र.महामृत्युंजय हवन के क्या लाभ हैं?

असामयिक मृत्यु से रक्षा होती है, गंभीर और दीर्घकालिक बीमारियाँ ठीक होती हैं, मृत्यु और दुर्घटनाओं का भय दूर होता है, दीर्घायु और स्वस्थ जीवन मिलता है।

प्र.महामृत्युंजय हवन का सबसे अच्छा समय क्या है?

सोमवार, प्रदोष, महाशिवरात्रि। या स्वास्थ्य संकट के समय। सुबह या शाम।

प्र.महामृत्युंजय हवन के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

हवन कुंड, बेल की लकड़ी, घी, तिल, जौ, विशेष जड़ी-बूटियाँ, कपूर, अगरबत्ती, महामृत्युंजय यंत्र।

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