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देवी पूजा — वैदिक पूजा विधि

त्रिपुर सुंदरी पूजा

देवता देवी त्रिपुर सुंदरी (षोडशी / ललिता)
अवधि 2–4 घंटे (सामान्य); श्री विद्या दीक्षा हेतु 16 दिवसीय षोडशी साधना
श्रेणी देवी पूजा

संक्षिप्त परिचय

त्रिपुर सुंदरी पूजा तृतीय महाविद्या की उपासना है। षोडशी (सोलह वर्षीया), ललिता (क्रीडाशीला) और राजराजेश्वरी (देवियों की रानी) के नाम से प्रसिद्ध ये महाविद्या सबसे सुंदर और परम मंगलकारी हैं। पंचब्रह्म सिंहासन पर आसीन, शिव को आसन बनाकर विराजमान, ये हजार उगते सूर्यों की लालिमा से दीप्त हैं। श्री यंत्र (श्री चक्र) इनका स्वरूप एवं प्राथमिक उपासना-प्रतीक है। षोडशी मंत्र श्री विद्या तंत्र का परम रहस्य है; यह परंपरागत रूप से केवल सद्गुरु से दीक्षित शिष्य को ही दिया जाता है। ललिता सहस्रनाम और ललिता त्रिशती इनके प्रमुख स्तुति-ग्रंथ हैं।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

परम सौंदर्य, आकर्षण और चुंबकीय व्यक्तित्व प्राप्त होता है, भोग और मोक्ष दोनों एक साथ प्राप्त होते हैं, श्री विद्या दीक्षा और ध्यान की उच्चतम अवस्थाएं सुलभ होती हैं, विवाह और संबंधों में सामंजस्य आता है, जीवन के श्रेष्ठतम अनुभव और समृद्धि प्राप्त होती है।

चरण-दर-चरण विधि

लाल कपड़े पर श्री यंत्र (श्री चक्र) स्थापित करें। पंचामृत और गुलाब जल से स्थान शुद्ध करें। पूर्व दिशा में बैठें। गणेश वंदना के बाद नवार्ण मंत्र से देवी का आवाहन करें। षोडशोपचार (16 उपचार) अर्पित करें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, आभूषण, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, प्रदक्षिणा। ललिता सहस्रनाम का सम्पूर्ण पाठ करें। लाल फूल (गुलाब, लाल कमल), लाल मिठाई और शहद चढ़ाएं। ललिता आरती और खड्गमाला स्तोत्र से समापन करें।

शुभ मुहूर्त

शुक्ल पक्ष की नवमी, शुक्रवार, दोनों नवरात्रि (चैत्र और शारदीय), ललिता जयंती। शुक्ल पूर्णिमा को गोधूलि वेला में की गई पूजा परम शुभकारी मानी जाती है।

आवश्यक सामग्री

  • ·श्री यंत्र (श्री चक्र)
  • ·लाल कपड़ा
  • ·लाल गुलाब और लाल कमल
  • ·लाल मिठाई (गुलाब जामुन, गुलाबी बर्फी)
  • ·शहद
  • ·गुलाब जल
  • ·लाल सिंदूर
  • ·लाल चूड़ियां
  • ·पंचामृत
  • ·अगरबत्ती (गुलाब या केसर)
  • ·घी का दीपक
  • ·सुपारी-सहित पान

सामान्य प्रश्न

प्र.त्रिपुर सुंदरी पूजा क्या है?

त्रिपुर सुंदरी पूजा तृतीय महाविद्या की उपासना है। षोडशी (सोलह वर्षीया), ललिता (क्रीडाशीला) और राजराजेश्वरी (देवियों की रानी) के नाम से प्रसिद्ध ये महाविद्या सबसे सुंदर और परम मंगलकारी हैं। पंचब्रह्म सिंहासन पर आसीन, शिव को आसन बनाकर विराजमान, ये हजार...

प्र.त्रिपुर सुंदरी पूजा के क्या लाभ हैं?

परम सौंदर्य, आकर्षण और चुंबकीय व्यक्तित्व प्राप्त होता है, भोग और मोक्ष दोनों एक साथ प्राप्त होते हैं, श्री विद्या दीक्षा और ध्यान की उच्चतम अवस्थाएं सुलभ होती हैं, विवाह और संबंधों में सामंजस्य आता है, जीवन के श्रेष्ठतम अनुभव और समृद्धि प्राप्त होती है।

प्र.त्रिपुर सुंदरी पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

शुक्ल पक्ष की नवमी, शुक्रवार, दोनों नवरात्रि (चैत्र और शारदीय), ललिता जयंती। शुक्ल पूर्णिमा को गोधूलि वेला में की गई पूजा परम शुभकारी मानी जाती है।

प्र.त्रिपुर सुंदरी पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

श्री यंत्र (श्री चक्र), लाल कपड़ा, लाल गुलाब और लाल कमल, लाल मिठाई (गुलाब जामुन, गुलाबी बर्फी), शहद, गुलाब जल, लाल सिंदूर, लाल चूड़ियां, पंचामृत, अगरबत्ती (गुलाब या केसर), घी का दीपक, सुपारी-सहित पान।

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