ग्रह पूजाएं — वैदिक पूजा विधि
सूर्य पूजा
संक्षिप्त परिचय
सूर्य पूजा सूर्य देव — सभी जीवन को बनाए रखने वाले दृश्यमान देवता — की आराधना है। सूर्योदय के समय की जाती है, इसमें सूर्य अर्घ्य (उगते सूरज को जल अर्पण), सूर्य अष्टकम, आदित्य हृदयम या गायत्री मंत्र का जाप शामिल है। कमजोर सूर्य वाले, स्वास्थ्य समस्याओं और सरकारी तथा सार्वजनिक जीवन में सफलता चाहने वालों के लिए अनुशंसित।
अंतिम अपडेट: 19 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
जन्म कुंडली में सूर्य मजबूत होता है, स्वास्थ्य और जीवनशक्ति बढ़ती है, सरकारी नौकरियों और सार्वजनिक जीवन में सफलता मिलती है, आत्मविश्वास और अधिकार बढ़ता है।
चरण-दर-चरण विधि
सूर्योदय से पहले उठें। स्नान करके साफ कपड़े पहनें। पूर्व दिशा की ओर मुख करें। ताँबे के बर्तन से उगते सूर्य की ओर पानी की धारा डालें। सूर्य बीज मंत्र (ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः) या गायत्री मंत्र 108 बार जपें।
शुभ मुहूर्त
प्रत्येक रविवार सूर्योदय पर। रथ सप्तमी (सूर्य जयंती)। या सर्वोत्तम परिणाम के लिए प्रतिदिन सूर्योदय पर।
आवश्यक सामग्री
- ·ताँबे का लोटा
- ·साफ पानी
- ·लाल फूल
- ·रोली (सिंदूर)
- ·अगरबत्ती
सामान्य प्रश्न
प्र.सूर्य पूजा क्या है?
सूर्य पूजा सूर्य देव — सभी जीवन को बनाए रखने वाले दृश्यमान देवता — की आराधना है। सूर्योदय के समय की जाती है, इसमें सूर्य अर्घ्य (उगते सूरज को जल अर्पण), सूर्य अष्टकम, आदित्य हृदयम या गायत्री मंत्र का जाप शामिल है। कमजोर सूर्य वाले, स्वास्थ्य समस्याओं...
प्र.सूर्य पूजा के क्या लाभ हैं?
जन्म कुंडली में सूर्य मजबूत होता है, स्वास्थ्य और जीवनशक्ति बढ़ती है, सरकारी नौकरियों और सार्वजनिक जीवन में सफलता मिलती है, आत्मविश्वास और अधिकार बढ़ता है।
प्र.सूर्य पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?
प्रत्येक रविवार सूर्योदय पर। रथ सप्तमी (सूर्य जयंती)। या सर्वोत्तम परिणाम के लिए प्रतिदिन सूर्योदय पर।
प्र.सूर्य पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
ताँबे का लोटा, साफ पानी, लाल फूल, रोली (सिंदूर), अगरबत्ती।