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ग्रह पूजाएं — वैदिक पूजा विधि

केतु पूजा

देवता केतु (दक्षिण चंद्र नोड)
अवधि 1–2 घंटे
श्रेणी ग्रह पूजाएं

संक्षिप्त परिचय

केतु पूजा केतु — मोक्ष, पूर्व जन्म, वैराग्य और आध्यात्मिक जागरण से जुड़े शिरविहीन छाया ग्रह — को शांत करने के लिए की जाती है। दुष्ट केतु मानसिक परेशानियां, नुकसान और रहस्यमय स्वास्थ्य समस्याएं देता है। इसमें भगवान गणेश (केतु के स्वामी) की पूजा, रंगीन या पैबंदी कपड़ा चढ़ाना शामिल है।

अंतिम अपडेट: 19 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

केतु के दुष्प्रभाव कम होते हैं, रहस्यमय बीमारियाँ दूर होती हैं, आध्यात्मिक जागरण होता है, कर्म ऋण दूर होते हैं, वैराग्य आता है।

चरण-दर-चरण विधि

केतु के प्राथमिक देवता के रूप में गणेश की पूजा करें। रंगीन पैबंदी कपड़ा चढ़ाएं। तिल और भूरे/भूरे रंग की वस्तुएं चढ़ाएं। केतु बीज मंत्र (ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः) 108 बार जपें। कुत्तों को खाना खिलाएं।

शुभ मुहूर्त

मंगलवार या शनिवार। केतु महादशा या अंतर्दशा काल। सूर्य ग्रहण।

आवश्यक सामग्री

  • ·केतु प्रतिमा या यंत्र
  • ·रंगीन कपड़ा
  • ·तिल
  • ·अगरबत्ती
  • ·भूरे/धूसर फूल
  • ·दीपक

सामान्य प्रश्न

प्र.केतु पूजा क्या है?

केतु पूजा केतु — मोक्ष, पूर्व जन्म, वैराग्य और आध्यात्मिक जागरण से जुड़े शिरविहीन छाया ग्रह — को शांत करने के लिए की जाती है। दुष्ट केतु मानसिक परेशानियां, नुकसान और रहस्यमय स्वास्थ्य समस्याएं देता है। इसमें भगवान गणेश (केतु के स्वामी) की पूजा, रंगीन...

प्र.केतु पूजा के क्या लाभ हैं?

केतु के दुष्प्रभाव कम होते हैं, रहस्यमय बीमारियाँ दूर होती हैं, आध्यात्मिक जागरण होता है, कर्म ऋण दूर होते हैं, वैराग्य आता है।

प्र.केतु पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

मंगलवार या शनिवार। केतु महादशा या अंतर्दशा काल। सूर्य ग्रहण।

प्र.केतु पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

केतु प्रतिमा या यंत्र, रंगीन कपड़ा, तिल, अगरबत्ती, भूरे/धूसर फूल, दीपक।

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