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वैदिक ज्योतिष एवं ज्योतिष गणना

ग्रह पूजाएं, वैदिक पूजा विधि

राहु पूजा

देवता राहु (उत्तर चंद्र नोड)
अवधि 1–2 घंटे
श्रेणी ग्रह पूजाएं

संक्षिप्त परिचय

राहु पूजा राहु, अचानक परिवर्तन, जुनून, विदेशी संबंधों और आध्यात्मिक भ्रम से जुड़े छाया ग्रह, के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए की जाती है। राहु महादशा, अंतर्दशा, या जब राहु जन्म कुंडली के 1, 7, 8 या 12वें भाव में हो तब अनुशंसित। पूजा में नीले फूल, नारियल और दुर्गा पूजा शामिल है।

अंतिम अपडेट: 13 जून 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

राहु के दुष्प्रभाव कम होते हैं, अचानक झटके और भ्रम दूर होते हैं, विदेशी संबंध सुधरते हैं, दुर्घटनाओं और विवादों से बचाव होता है।

चरण-दर-चरण विधि

शनिवार या राहु काल में करें। दक्षिण-पश्चिम दिशा में मुख करें। देवी दुर्गा के साथ राहु की पूजा करें। नीले/गहरे रंग के फूल और नारियल चढ़ाएं। राहु बीज मंत्र (ॐ रां राहवे नमः) 108 बार जपें।

शुभ मुहूर्त

शनिवार राहु काल में। ग्रहण के दौरान। राहु जयंती।

आवश्यक सामग्री

  • ·राहु प्रतिमा या यंत्र
  • ·नीले फूल
  • ·नारियल
  • ·नीला कपड़ा
  • ·सरसों
  • ·अगरबत्ती
  • ·दीपक

सामान्य प्रश्न

प्र.राहु पूजा क्या है?

राहु पूजा राहु, अचानक परिवर्तन, जुनून, विदेशी संबंधों और आध्यात्मिक भ्रम से जुड़े छाया ग्रह, के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए की जाती है। राहु महादशा, अंतर्दशा, या जब राहु जन्म कुंडली के 1, 7, 8 या 12वें भाव में हो तब अनुशंसित। पूजा में नीले फूल, ना...

प्र.राहु पूजा के क्या लाभ हैं?

राहु के दुष्प्रभाव कम होते हैं, अचानक झटके और भ्रम दूर होते हैं, विदेशी संबंध सुधरते हैं, दुर्घटनाओं और विवादों से बचाव होता है।

प्र.राहु पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

शनिवार राहु काल में। ग्रहण के दौरान। राहु जयंती।

प्र.राहु पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

राहु प्रतिमा या यंत्र, नीले फूल, नारियल, नीला कपड़ा, सरसों, अगरबत्ती, दीपक।

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