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ग्रह पूजाएं — वैदिक पूजा विधि

मंगल पूजा

देवता भगवान मंगल (मंगलदेव)
अवधि 1–2 घंटे
श्रेणी ग्रह पूजाएं

संक्षिप्त परिचय

मंगल पूजा मंगल ग्रह को शांत करने के लिए की जाती है ताकि मंगल दोष (कुज दोष) — जन्म कुंडली के 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में मंगल की दुष्ट स्थिति का प्रभाव — दूर हो सके। मंगल दोष विवाह और संबंधों में बाधाएं उत्पन्न करता है।

अंतिम अपडेट: 19 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

मंगल दोष दूर होता है, सुखी विवाह सुनिश्चित होता है, आक्रामकता और विवाद कम होते हैं, शारीरिक शक्ति और स्वास्थ्य सुधरता है।

चरण-दर-चरण विधि

मंगलवार को हनुमान मंदिर जाएं। लाल फूल और मसूर दाल चढ़ाएं। मंगल बीज मंत्र (ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः) 108 बार जपें। हनुमान चालीसा पढ़ें। गरीबों को लाल कपड़ा और मसूर दाल दान करें।

शुभ मुहूर्त

प्रत्येक मंगलवार, विशेषकर सूर्यास्त पर। मंगल का नई राशि में गोचर। मंगल महादशा के दौरान।

आवश्यक सामग्री

  • ·हनुमान प्रतिमा
  • ·लाल फूल
  • ·मसूर दाल
  • ·लाल कपड़ा
  • ·अगरबत्ती
  • ·घी का दीपक

सामान्य प्रश्न

प्र.मंगल पूजा क्या है?

मंगल पूजा मंगल ग्रह को शांत करने के लिए की जाती है ताकि मंगल दोष (कुज दोष) — जन्म कुंडली के 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में मंगल की दुष्ट स्थिति का प्रभाव — दूर हो सके। मंगल दोष विवाह और संबंधों में बाधाएं उत्पन्न करता है।

प्र.मंगल पूजा के क्या लाभ हैं?

मंगल दोष दूर होता है, सुखी विवाह सुनिश्चित होता है, आक्रामकता और विवाद कम होते हैं, शारीरिक शक्ति और स्वास्थ्य सुधरता है।

प्र.मंगल पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

प्रत्येक मंगलवार, विशेषकर सूर्यास्त पर। मंगल का नई राशि में गोचर। मंगल महादशा के दौरान।

प्र.मंगल पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

हनुमान प्रतिमा, लाल फूल, मसूर दाल, लाल कपड़ा, अगरबत्ती, घी का दीपक।

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