शिव पूजा — वैदिक पूजा विधि
सोमनाथ पूजा
संक्षिप्त परिचय
सोमनाथ पूजा भगवान शिव के सोमनाथ स्वरूप की आराधना के लिए की जाती है — जो चंद्रमा के स्वामी और सम्पूर्ण सृष्टि के रक्षक हैं। सोमनाथ बारह ज्योतिर्लिंगों में से पहला और सबसे पवित्र है, जो गुजरात के पश्चिमी तट पर स्थित है। भक्त इस पूजा से पापों से मुक्ति, चंद्र दोष से राहत और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पूजा में दूध, शहद और गंगाजल से शिवलिंग अभिषेक, शिव पंचाक्षर मंत्र (ॐ नमः शिवाय) का जाप और बेल पत्र अर्पण शामिल है।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
चंद्र दोष और नकारात्मक चंद्र प्रभाव दूर होते हैं, आत्मा पिछले पापों से शुद्ध होती है, मन की शांति और भावनात्मक स्थिरता मिलती है, अच्छा स्वास्थ्य और दीर्घायु प्राप्त होती है, और मोक्ष की ओर मार्ग प्रशस्त होता है।
चरण-दर-चरण विधि
गणेश पूजा और संकल्प से शुरू करें। स्वच्छ वेदी पर शिवलिंग स्थापित करें। पंचामृत अभिषेक (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर) और गंगाजल अभिषेक करें। बेल पत्र, सफेद फूल, धतूरा और चंदन का लेप अर्पित करें। शिव पंचाक्षर मंत्र का 108 बार जाप करें और सोमनाथ अष्टकम पढ़ें। कपूर से आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
शुभ मुहूर्त
श्रावण माह के सोमवार, प्रदोष व्रत (त्रयोदशी), महाशिवरात्रि और अमावस्या। सोमवार सूर्योदय के बाद का समय सर्वाधिक शुभ है।
आवश्यक सामग्री
- ·शिवलिंग
- ·दूध
- ·दही
- ·शहद
- ·घी
- ·गंगाजल
- ·बेल पत्र
- ·सफेद फूल
- ·धतूरा
- ·चंदन का लेप
- ·कपूर
- ·अगरबत्ती
- ·पंचामृत
सामान्य प्रश्न
प्र.सोमनाथ पूजा क्या है?
सोमनाथ पूजा भगवान शिव के सोमनाथ स्वरूप की आराधना के लिए की जाती है — जो चंद्रमा के स्वामी और सम्पूर्ण सृष्टि के रक्षक हैं। सोमनाथ बारह ज्योतिर्लिंगों में से पहला और सबसे पवित्र है, जो गुजरात के पश्चिमी तट पर स्थित है। भक्त इस पूजा से पापों से मुक्ति,...
प्र.सोमनाथ पूजा के क्या लाभ हैं?
चंद्र दोष और नकारात्मक चंद्र प्रभाव दूर होते हैं, आत्मा पिछले पापों से शुद्ध होती है, मन की शांति और भावनात्मक स्थिरता मिलती है, अच्छा स्वास्थ्य और दीर्घायु प्राप्त होती है, और मोक्ष की ओर मार्ग प्रशस्त होता है।
प्र.सोमनाथ पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?
श्रावण माह के सोमवार, प्रदोष व्रत (त्रयोदशी), महाशिवरात्रि और अमावस्या। सोमवार सूर्योदय के बाद का समय सर्वाधिक शुभ है।
प्र.सोमनाथ पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
शिवलिंग, दूध, दही, शहद, घी, गंगाजल, बेल पत्र, सफेद फूल, धतूरा, चंदन का लेप, कपूर, अगरबत्ती, पंचामृत।