आज: वैदिक ज्योतिष · प्राचीन · सटीक · मुफ्त
खंड १ · अंक १ · स्था. MMXXVIरविवार, 19 अप्रैल 2026मुफ्त · वैदिक · सटीक
VedicBirth
वैदिक ज्योतिष एवं ज्योतिष गणना
Aaj: Vedic Astrology & Jyotish · Free · Precise
Vol. I · No. 1 · Est. MMXXVISunday, 19 April 2026Free · Vedic · Precise
VedicBirth
Vedic Astrology & Jyotish Calculations
8,241Kundlis Generated
50+Free Tools
27Nakshatras
12Rashis Decoded
100%Free Forever

शिव पूजा — वैदिक पूजा विधि

रुद्राभिषेक

देवता भगवान शिव (रुद्र)
अवधि 3–4 घंटे
श्रेणी शिव पूजा

संक्षिप्त परिचय

रुद्राभिषेक एक शक्तिशाली वैदिक अनुष्ठान है जिसमें भगवान शिव के शिवलिंग पर दूध, दही, शहद, घी, गन्ने का रस और पवित्र नदियों के जल से अभिषेक किया जाता है और यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी या श्री रुद्रम् का पाठ किया जाता है। यह शनि, राहु और केतु के दुष्प्रभावों को दूर करने और मोक्ष प्राप्ति के लिए सर्वोत्तम उपाय माना जाता है।

अंतिम अपडेट: 19 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

ग्रहों के दुष्प्रभाव दूर होते हैं, रोगों से मुक्ति मिलती है, भय और चिंता दूर होती है, मोक्ष की प्राप्ति होती है, सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

चरण-दर-चरण विधि

स्नान करके शुद्ध हों। वेदी पर शिवलिंग स्थापित करें। गणेश पूजा से आरंभ करें। श्री रुद्रम् का पाठ करते हुए प्रत्येक पवित्र द्रव्य शिवलिंग पर चढ़ाएं। बेलपत्र, भस्म और धतूरा अर्पित करें। शिव आरती और महामृत्युंजय मंत्र से समाप्त करें।

शुभ मुहूर्त

प्रदोष (चंद्र पक्ष की 13वीं तिथि), सोमवार, महाशिवरात्रि, श्रावण मास, या श्रावण के किसी भी सोमवार।

आवश्यक सामग्री

  • ·शिवलिंग
  • ·दूध
  • ·दही
  • ·शहद
  • ·घी
  • ·गन्ने का रस
  • ·बेलपत्र
  • ·भस्म
  • ·धतूरा
  • ·रुद्राक्ष
  • ·पंचामृत

सामान्य प्रश्न

प्र.रुद्राभिषेक क्या है?

रुद्राभिषेक एक शक्तिशाली वैदिक अनुष्ठान है जिसमें भगवान शिव के शिवलिंग पर दूध, दही, शहद, घी, गन्ने का रस और पवित्र नदियों के जल से अभिषेक किया जाता है और यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी या श्री रुद्रम् का पाठ किया जाता है। यह शनि, राहु और केतु के दुष्प्...

प्र.रुद्राभिषेक के क्या लाभ हैं?

ग्रहों के दुष्प्रभाव दूर होते हैं, रोगों से मुक्ति मिलती है, भय और चिंता दूर होती है, मोक्ष की प्राप्ति होती है, सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

प्र.रुद्राभिषेक का सबसे अच्छा समय क्या है?

प्रदोष (चंद्र पक्ष की 13वीं तिथि), सोमवार, महाशिवरात्रि, श्रावण मास, या श्रावण के किसी भी सोमवार।

प्र.रुद्राभिषेक के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

शिवलिंग, दूध, दही, शहद, घी, गन्ने का रस, बेलपत्र, भस्म, धतूरा, रुद्राक्ष, पंचामृत।