देवी पूजा — वैदिक पूजा विधि
सप्त मातृका पूजा
संक्षिप्त परिचय
सप्त मातृका पूजा सात दिव्य माताओं — ब्राह्मणी, वैष्णवी, माहेश्वरी, इंद्राणी, कौमारी, वाराही और चामुंडा — की सामूहिक आराधना है, जो मिलकर सभी ब्रह्मांडीय कार्यों में दिव्य स्त्री शक्ति की समग्रता का प्रतिनिधित्व करती हैं। प्रत्येक मातृका संबंधित पुरुष देवता की शक्ति है — ब्राह्मणी ब्रह्मा की, वैष्णवी विष्णु की, माहेश्वरी शिव की, इंद्राणी इंद्र की, कौमारी स्कंद की, वाराही वराह की और चामुंडा शिव के रौद्र पक्ष की। देवी महात्म्य में ये सप्त मातृकाएं महिषासुर के विरुद्ध युद्ध में दुर्गा की सहायता के लिए देवताओं के शरीर से प्रकट होती हैं।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
सप्त मातृकाओं की सामूहिक पूजा दिव्य स्त्री सुरक्षा के पूर्ण स्पेक्ट्रम का आह्वान करती है। सात माताएं मिलकर बच्चों की सुरक्षा (जन्म से ही मातृकाएं बच्चों की पारंपरिक रक्षक हैं), बचपन की बीमारियों से मुक्ति, प्रजनन आशीर्वाद और वंश की सुरक्षा प्रदान करती हैं। वे सभी प्रमुख पुरुष देवताओं की संयुक्त शक्ति देकर सभी प्रयासों में विजय दिलाती हैं। पूजा से भय दूर होते हैं, काला जादू और बाल ग्रह समाप्त होते हैं।
चरण-दर-चरण विधि
सप्त मातृका पूजा, विशेषकर पूर्ण आगमिक अनुष्ठान, एक विद्वान पुरोहित द्वारा करना सर्वोत्तम है। सात मातृकाओं की छवियां या यंत्र एक पंक्ति में स्थापित करें — परंपरागत रूप से पूर्वमुखी। प्रारंभिक चरण के रूप में यदि संभव हो तो हवन करें। प्रत्येक मातृका को पंचामृत से स्नान कराएं। प्रत्येक देवी के लिए विशिष्ट फूल, रंग और सामग्री अर्पित करें। देवी भागवत से मातृका स्तोत्र का पाठ करें। एक साथ सात तेल के दीपक जलाएं। पंचगव्य या मौसमी फलों का नैवेद्य चढ़ाएं। सातों देवियों की एक साथ आरती करें।
शुभ मुहूर्त
नवरात्रि सप्त मातृका पूजा का प्रमुख अवसर है। नवरात्रि की षष्ठी (छठे दिन) को मातृकाएं नवजात शिशुओं की रक्षक के रूप में विशेष रूप से पूजी जाती हैं। सप्त मातृका मंदिरों में नवरात्रि और पूर्णिमा की रातों में विशाल जनसमूह एकत्र होता है। वर्ष भर शुक्रवार और मंगलवार शुभ रहते हैं।
आवश्यक सामग्री
- ·सप्त मातृकाओं की सात छवियां या यंत्र
- ·सात तेल के दीपक
- ·रंग-बिरंगे फूल (सात प्रकार)
- ·पंचामृत
- ·लाल, सफेद और पीले वस्त्र
- ·सिंदूर
- ·कुमकुम
- ·अगरबत्ती
- ·कपूर
- ·नारियल
- ·मौसमी फल
- ·देवी भागवत या मातृका स्तोत्र पाठ
- ·अक्षत
- ·चंदन का लेप
सामान्य प्रश्न
प्र.सप्त मातृका पूजा क्या है?
सप्त मातृका पूजा सात दिव्य माताओं — ब्राह्मणी, वैष्णवी, माहेश्वरी, इंद्राणी, कौमारी, वाराही और चामुंडा — की सामूहिक आराधना है, जो मिलकर सभी ब्रह्मांडीय कार्यों में दिव्य स्त्री शक्ति की समग्रता का प्रतिनिधित्व करती हैं। प्रत्येक मातृका संबंधित पुरुष ...
प्र.सप्त मातृका पूजा के क्या लाभ हैं?
सप्त मातृकाओं की सामूहिक पूजा दिव्य स्त्री सुरक्षा के पूर्ण स्पेक्ट्रम का आह्वान करती है। सात माताएं मिलकर बच्चों की सुरक्षा (जन्म से ही मातृकाएं बच्चों की पारंपरिक रक्षक हैं), बचपन की बीमारियों से मुक्ति, प्रजनन आशीर्वाद और वंश की सुरक्षा प्रदान करती हैं। वे सभी प्रमुख पुरुष देवताओं की संयुक्त शक्ति देकर सभी प्रयासों में विजय दिलाती हैं। पूजा से भय दूर होते हैं, काला जादू और बाल ग्रह समाप्त होते हैं।
प्र.सप्त मातृका पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?
नवरात्रि सप्त मातृका पूजा का प्रमुख अवसर है। नवरात्रि की षष्ठी (छठे दिन) को मातृकाएं नवजात शिशुओं की रक्षक के रूप में विशेष रूप से पूजी जाती हैं। सप्त मातृका मंदिरों में नवरात्रि और पूर्णिमा की रातों में विशाल जनसमूह एकत्र होता है। वर्ष भर शुक्रवार और मंगलवार शुभ रहते हैं।
प्र.सप्त मातृका पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
सप्त मातृकाओं की सात छवियां या यंत्र, सात तेल के दीपक, रंग-बिरंगे फूल (सात प्रकार), पंचामृत, लाल, सफेद और पीले वस्त्र, सिंदूर, कुमकुम, अगरबत्ती, कपूर, नारियल, मौसमी फल, देवी भागवत या मातृका स्तोत्र पाठ, अक्षत, चंदन का लेप।