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शिव पूजा — वैदिक पूजा विधि

बिल्व पूजा

देवता भगवान शिव
अवधि 45 मिनट–1.5 घंटे
श्रेणी शिव पूजा

संक्षिप्त परिचय

बिल्व पूजा भगवान शिव को बिल्वपत्र (बेल के पत्ते) अर्पित करने की पवित्र क्रिया है। बिल्व वृक्ष (एगल मार्मेलोस) शिव का सबसे पवित्र वृक्ष माना जाता है — तीन पत्तियों वाला प्रत्येक पत्ता शिव की तीन आंखों, त्रिमूर्ति या तीन शक्तियों का प्रतीक है। शिव पुराण के अनुसार, एक भी बिल्वपत्र भक्ति से अर्पित करने का पुण्य हजार हाथी दान देने या सबसे विस्तृत यज्ञ करने के समान है।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

बड़े यज्ञों के समान अत्यधिक आध्यात्मिक पुण्य मिलता है, सभी पाप दूर होते हैं, शिव की प्रत्यक्ष कृपा मिलती है, धन और संतान की इच्छाएं पूरी होती हैं, रोग और कष्ट दूर होते हैं।

चरण-दर-चरण विधि

ताजे बिल्वपत्र इकट्ठे करें — बिना छेद या क्षति के तीन पत्तियों वाले। धोकर सुखाएं। स्वच्छ वेदी पर शिवलिंग स्थापित करें। गणेश आवाहन से शुरू करें। प्रत्येक बिल्वपत्र शिव के एक नाम या बिल्व मंत्र "ॐ नमः शिवाय" जपते हुए शिवलिंग पर चढ़ाएं या पूरे बिल्वाष्टकम (8 श्लोक) का पाठ करें। कुल 108 पत्ते अर्पित करें। अभिषेक, आरती और प्रसाद वितरण से समाप्त करें।

शुभ मुहूर्त

सोमवार, प्रदोष काल (त्रयोदशी की संध्या), महाशिवरात्रि और पूरे श्रावण मास में। श्रावण के सोमवार को सबसे अधिक पुण्यकारी।

आवश्यक सामग्री

  • ·108 ताजे बिल्वपत्र
  • ·शिवलिंग
  • ·शुद्ध जल
  • ·दूध
  • ·अगरबत्ती
  • ·घी का दीपक
  • ·सफेद फूल
  • ·चंदन
  • ·विभूति

सामान्य प्रश्न

प्र.बिल्व पूजा क्या है?

बिल्व पूजा भगवान शिव को बिल्वपत्र (बेल के पत्ते) अर्पित करने की पवित्र क्रिया है। बिल्व वृक्ष (एगल मार्मेलोस) शिव का सबसे पवित्र वृक्ष माना जाता है — तीन पत्तियों वाला प्रत्येक पत्ता शिव की तीन आंखों, त्रिमूर्ति या तीन शक्तियों का प्रतीक है। शिव पुरा...

प्र.बिल्व पूजा के क्या लाभ हैं?

बड़े यज्ञों के समान अत्यधिक आध्यात्मिक पुण्य मिलता है, सभी पाप दूर होते हैं, शिव की प्रत्यक्ष कृपा मिलती है, धन और संतान की इच्छाएं पूरी होती हैं, रोग और कष्ट दूर होते हैं।

प्र.बिल्व पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

सोमवार, प्रदोष काल (त्रयोदशी की संध्या), महाशिवरात्रि और पूरे श्रावण मास में। श्रावण के सोमवार को सबसे अधिक पुण्यकारी।

प्र.बिल्व पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

108 ताजे बिल्वपत्र, शिवलिंग, शुद्ध जल, दूध, अगरबत्ती, घी का दीपक, सफेद फूल, चंदन, विभूति।

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