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देवी पूजा — वैदिक पूजा विधि

राधा पूजा

देवता श्रीमती राधा रानी
अवधि 1–2 घंटे
श्रेणी देवी पूजा

संक्षिप्त परिचय

राधा पूजा में श्रीमती राधा रानी की आराधना होती है — भगवान कृष्ण की परम प्रेमिका, दिव्य प्रेम (प्रेम) की साक्षात मूर्ति और वैष्णव परंपरा में विष्णु की सर्वोच्च शक्ति। गौडीय वैष्णव दर्शन में राधा को लक्ष्मी से भी उच्च माना जाता है, क्योंकि वे शुद्धतम और निःस्वार्थ भक्ति का स्वरूप हैं। कृष्ण पूजा से पहले या साथ में राधा पूजा करने से पूजा का प्रभाव दसगुना बढ़ जाता है। राधाष्टमी उनकी सबसे पवित्र तिथि है।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

हृदय में शुद्ध भक्ति और निःशर्त प्रेम जागृत होता है, अहंकार और घमंड नष्ट होता है, भगवान कृष्ण की कृपा सहज प्राप्त होती है, टूटे संबंध ठीक होते हैं और प्रेम-सामंजस्य आता है, काल सर्प दोष शांत होता है, मन-आत्मा को शांति मिलती है।

चरण-दर-चरण विधि

राधा-कृष्ण की प्रतिमा या केवल राधा के चित्र के साथ वेदी स्थापित करें। सुगंधित फूलों — विशेषकर गुलाब, परिजात और गेंदे से सजाएं। ताजी तुलसी के पत्ते चढ़ाएं। माखन, मिसरी और ताजे फलों का भोग तैयार करें। राधा स्तोत्र, राधिका स्तव का पाठ करें या भक्ति भजन गाएं। भक्तिपूर्वक राधा आरती करें। "राधे राधे" या हरे कृष्ण महामंत्र का जप करें।

शुभ मुहूर्त

राधाष्टमी (भाद्रपद शुक्ल अष्टमी), प्रत्येक गुरुवार, जन्माष्टमी और एकादशी।

आवश्यक सामग्री

  • ·राधा या राधा-कृष्ण प्रतिमा
  • ·गुलाब और परिजात के फूल
  • ·तुलसी पत्ते
  • ·माखन
  • ·मिसरी
  • ·सुगंधित अगरबत्ती (गुलाब या चमेली)
  • ·घी का दीपक
  • ·पीला या गुलाबी कपड़ा
  • ·फल
  • ·पंचामृत
  • ·पान के पत्ते
  • ·चंदन

सामान्य प्रश्न

प्र.राधा पूजा क्या है?

राधा पूजा में श्रीमती राधा रानी की आराधना होती है — भगवान कृष्ण की परम प्रेमिका, दिव्य प्रेम (प्रेम) की साक्षात मूर्ति और वैष्णव परंपरा में विष्णु की सर्वोच्च शक्ति। गौडीय वैष्णव दर्शन में राधा को लक्ष्मी से भी उच्च माना जाता है, क्योंकि वे शुद्धतम औ...

प्र.राधा पूजा के क्या लाभ हैं?

हृदय में शुद्ध भक्ति और निःशर्त प्रेम जागृत होता है, अहंकार और घमंड नष्ट होता है, भगवान कृष्ण की कृपा सहज प्राप्त होती है, टूटे संबंध ठीक होते हैं और प्रेम-सामंजस्य आता है, काल सर्प दोष शांत होता है, मन-आत्मा को शांति मिलती है।

प्र.राधा पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

राधाष्टमी (भाद्रपद शुक्ल अष्टमी), प्रत्येक गुरुवार, जन्माष्टमी और एकादशी।

प्र.राधा पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

राधा या राधा-कृष्ण प्रतिमा, गुलाब और परिजात के फूल, तुलसी पत्ते, माखन, मिसरी, सुगंधित अगरबत्ती (गुलाब या चमेली), घी का दीपक, पीला या गुलाबी कपड़ा, फल, पंचामृत, पान के पत्ते, चंदन।

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