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देवी पूजा — वैदिक पूजा विधि

पार्वती पूजा

देवता माँ पार्वती
अवधि 1–2 घंटे
श्रेणी देवी पूजा

संक्षिप्त परिचय

पार्वती पूजा में देवी पार्वती की आराधना होती है — हिमवान (हिमालय) की पुत्री, भगवान शिव की परम भक्त पत्नी और गणेश-कार्तिकेय की दिव्य माता। वे सती के पुनर्जन्म के रूप में शक्ति का सर्वांग स्वरूप हैं — सौम्य, प्रेमपूर्ण और पोषणशील। पार्वती की पूजा वैवाहिक सुख, दांपत्य सामंजस्य और मातृत्व के आशीर्वाद के लिए की जाती है। सोलह सोमवार व्रत, गणेश चतुर्थी पर गौरी पूजा और हरतालिका तीज उनके प्रमुख अनुष्ठान हैं।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

अविवाहित स्त्रियों को प्रेमपूर्ण एवं सद्गुणी पति मिलता है, वैवाहिक संबंध मजबूत होते हैं, विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं, संतान की प्राप्ति होती है, घर में शांति एवं सद्भाव आता है, अहंकार और घमंड नष्ट होता है।

चरण-दर-चरण विधि

स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। देवी पार्वती (या गौरी स्वरूप) की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। षोडशोपचार से पूजन करें। फूल — विशेषकर सफेद और गुलाबी (कमल, चमेली, परिजात) — चढ़ाएं। कुमकुम और हल्दी का तिलक लगाएं। पार्वती स्तुति, गौरी स्तोत्र या ललिता सहस्रनाम का पाठ करें। महिलाएं चूड़ियां पहनें और सिंदूर चढ़ाएं। भक्तिपूर्वक आरती करें।

शुभ मुहूर्त

हरतालिका तीज (भाद्रपद शुक्ल तृतीया), प्रत्येक सोमवार, गौरी पूजा (गणेश चतुर्थी) और नवरात्रि।

आवश्यक सामग्री

  • ·पार्वती या गौरी प्रतिमा
  • ·सफेद और गुलाबी फूल (कमल, चमेली)
  • ·कुमकुम
  • ·हल्दी
  • ·हरी चूड़ियां
  • ·सिंदूर
  • ·नारियल
  • ·अगरबत्ती
  • ·घी का दीपक
  • ·फल
  • ·मिठाई (खीर या नारियल बर्फी)
  • ·पान के पत्ते

सामान्य प्रश्न

प्र.पार्वती पूजा क्या है?

पार्वती पूजा में देवी पार्वती की आराधना होती है — हिमवान (हिमालय) की पुत्री, भगवान शिव की परम भक्त पत्नी और गणेश-कार्तिकेय की दिव्य माता। वे सती के पुनर्जन्म के रूप में शक्ति का सर्वांग स्वरूप हैं — सौम्य, प्रेमपूर्ण और पोषणशील। पार्वती की पूजा वैवाह...

प्र.पार्वती पूजा के क्या लाभ हैं?

अविवाहित स्त्रियों को प्रेमपूर्ण एवं सद्गुणी पति मिलता है, वैवाहिक संबंध मजबूत होते हैं, विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं, संतान की प्राप्ति होती है, घर में शांति एवं सद्भाव आता है, अहंकार और घमंड नष्ट होता है।

प्र.पार्वती पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

हरतालिका तीज (भाद्रपद शुक्ल तृतीया), प्रत्येक सोमवार, गौरी पूजा (गणेश चतुर्थी) और नवरात्रि।

प्र.पार्वती पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

पार्वती या गौरी प्रतिमा, सफेद और गुलाबी फूल (कमल, चमेली), कुमकुम, हल्दी, हरी चूड़ियां, सिंदूर, नारियल, अगरबत्ती, घी का दीपक, फल, मिठाई (खीर या नारियल बर्फी), पान के पत्ते।

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