देवी पूजा — वैदिक पूजा विधि
ज्वाला देवी पूजा
संक्षिप्त परिचय
ज्वाला देवी पूजा उस देवी की आराधना है जो किसी मूर्ति के रूप में नहीं बल्कि हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में ज्वाला जी मंदिर में पृथ्वी से स्वतः प्रकट होने वाली नौ शाश्वत प्राकृतिक गैस ज्वालाओं के रूप में विराजमान हैं। यह असाधारण तीर्थस्थान 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहाँ देवी सती की जीभ गिरी थी, जो इसे सभी देवी मंदिरों में सर्वोच्च पवित्र बनाती है। देवी की पूजा नीली, पीली और सफेद ज्वालाओं के रूप में होती है जो सहस्राब्दियों से बिना किसी ईंधन स्रोत के जल रही हैं।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
ज्वाला देवी आदिशक्ति का वरदान अपने सबसे प्रत्यक्ष रूप — शुद्ध दैवी अग्नि — में प्रदान करती हैं। भक्तों को शत्रुओं, रोग और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है; करियर और व्यवसाय में बाधाएं दूर होती हैं; देवी तीव्र बुद्धि, आध्यात्मिक प्रकाश और आंतरिक साहस प्रदान करती हैं। इस शक्तिपीठ पर पूजा से समस्त सच्ची इच्छाएं पूरी होती हैं, संचित कर्म का शुद्धीकरण होता है और आत्मा जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त होती है।
चरण-दर-चरण विधि
ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करें और स्वच्छ सफेद या लाल वस्त्र पहनें। घर की वेदी पर घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं, ज्वाला देवी की छवि या शाश्वत ज्वाला के प्रतीक के रूप में दीया रखें। लाल फूल, नारियल, सिंदूर और लाल चुनरी अर्पित करें। ज्वाला देवी चालीसा या देवी स्तुति का पाठ करें। ज्वाला जी मंदिर जाने पर पहले पवित्र कुंड में स्नान करें, फिर नंगे पैर गर्भगृह में प्रवेश कर नौ दिव्य ज्वालाओं के दर्शन करें। मंदिर की तीन या सात परिक्रमा करें। ज्वाला देवी के 108 नामों का जाप करें और आरती करें।
शुभ मुहूर्त
नवरात्रि (चैत्र नवरात्रि और शारद नवरात्रि दोनों) सबसे शुभ समय है, जब ज्वाला जी मंदिर में विशाल जनसमूह एकत्र होता है। अष्टमी और नवमी सर्वोच्च दिन हैं। प्रत्येक शुक्रवार भी ज्वाला देवी को पवित्र माना जाता है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय मंदिर सर्वाधिक आध्यात्मिक रूप से ऊर्जावान होता है।
आवश्यक सामग्री
- ·ज्वाला देवी की छवि या यंत्र
- ·घी का दीपक
- ·लाल चुनरी
- ·सिंदूर
- ·लाल फूल (गुड़हल, गुलाब)
- ·नारियल
- ·अगरबत्ती
- ·कपूर
- ·कुमकुम
- ·अक्षत
- ·पंचामृत
- ·मौसमी फल
- ·ज्वाला देवी चालीसा
सामान्य प्रश्न
प्र.ज्वाला देवी पूजा क्या है?
ज्वाला देवी पूजा उस देवी की आराधना है जो किसी मूर्ति के रूप में नहीं बल्कि हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में ज्वाला जी मंदिर में पृथ्वी से स्वतः प्रकट होने वाली नौ शाश्वत प्राकृतिक गैस ज्वालाओं के रूप में विराजमान हैं। यह असाधारण तीर्थस्थान 51 शक्तिप...
प्र.ज्वाला देवी पूजा के क्या लाभ हैं?
ज्वाला देवी आदिशक्ति का वरदान अपने सबसे प्रत्यक्ष रूप — शुद्ध दैवी अग्नि — में प्रदान करती हैं। भक्तों को शत्रुओं, रोग और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है; करियर और व्यवसाय में बाधाएं दूर होती हैं; देवी तीव्र बुद्धि, आध्यात्मिक प्रकाश और आंतरिक साहस प्रदान करती हैं। इस शक्तिपीठ पर पूजा से समस्त सच्ची इच्छाएं पूरी होती हैं, संचित कर्म का शुद्धीकरण होता है और आत्मा जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त होती है।
प्र.ज्वाला देवी पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?
नवरात्रि (चैत्र नवरात्रि और शारद नवरात्रि दोनों) सबसे शुभ समय है, जब ज्वाला जी मंदिर में विशाल जनसमूह एकत्र होता है। अष्टमी और नवमी सर्वोच्च दिन हैं। प्रत्येक शुक्रवार भी ज्वाला देवी को पवित्र माना जाता है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय मंदिर सर्वाधिक आध्यात्मिक रूप से ऊर्जावान होता है।
प्र.ज्वाला देवी पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
ज्वाला देवी की छवि या यंत्र, घी का दीपक, लाल चुनरी, सिंदूर, लाल फूल (गुड़हल, गुलाब), नारियल, अगरबत्ती, कपूर, कुमकुम, अक्षत, पंचामृत, मौसमी फल, ज्वाला देवी चालीसा।