ग्रह पूजाएं — वैदिक पूजा विधि
गुरु (बृहस्पति) पूजा
संक्षिप्त परिचय
गुरु पूजा बृहस्पति — सबसे बड़ा और सबसे शुभ ग्रह, ज्ञान, धर्म, उच्च शिक्षा और संतान के शासक — को शांत करने के लिए की जाती है। गुरुवार को पीले फूल और केले के साथ की जाती है। कमजोर गुरु को मजबूत बनाती है, उच्च शिक्षा और विवाह की बाधाएं दूर करती है।
अंतिम अपडेट: 19 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
गुरु मजबूत होता है, उच्च शिक्षा में सफलता मिलती है, बुद्धिमान और सदाचारी जीवनसाथी मिलता है, संतान प्राप्ति होती है, आर्थिक स्थिति सुधरती है।
चरण-दर-चरण विधि
गुरुवार को करें। पीले फूल और केले के साथ बृहस्पति या विष्णु की पूजा करें। पीला भोजन (चना दाल, केला) चढ़ाएं। गुरु बीज मंत्र (ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः) 108 बार जपें।
शुभ मुहूर्त
प्रत्येक गुरुवार। गुरु पूर्णिमा। गुरु महादशा के दौरान। पुष्य नक्षत्र।
आवश्यक सामग्री
- ·विष्णु/बृहस्पति प्रतिमा
- ·पीले फूल
- ·केला
- ·पीला कपड़ा
- ·हल्दी
- ·चना दाल
- ·अगरबत्ती
सामान्य प्रश्न
प्र.गुरु (बृहस्पति) पूजा क्या है?
गुरु पूजा बृहस्पति — सबसे बड़ा और सबसे शुभ ग्रह, ज्ञान, धर्म, उच्च शिक्षा और संतान के शासक — को शांत करने के लिए की जाती है। गुरुवार को पीले फूल और केले के साथ की जाती है। कमजोर गुरु को मजबूत बनाती है, उच्च शिक्षा और विवाह की बाधाएं दूर करती है।
प्र.गुरु (बृहस्पति) पूजा के क्या लाभ हैं?
गुरु मजबूत होता है, उच्च शिक्षा में सफलता मिलती है, बुद्धिमान और सदाचारी जीवनसाथी मिलता है, संतान प्राप्ति होती है, आर्थिक स्थिति सुधरती है।
प्र.गुरु (बृहस्पति) पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?
प्रत्येक गुरुवार। गुरु पूर्णिमा। गुरु महादशा के दौरान। पुष्य नक्षत्र।
प्र.गुरु (बृहस्पति) पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
विष्णु/बृहस्पति प्रतिमा, पीले फूल, केला, पीला कपड़ा, हल्दी, चना दाल, अगरबत्ती।