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विष्णु एवं वैष्णव — वैदिक पूजा विधि

गोवर्धन पूजा

देवता भगवान कृष्ण (गोवर्धन)
अवधि 2–3 घंटे
श्रेणी विष्णु एवं वैष्णव

संक्षिप्त परिचय

गोवर्धन पूजा भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर वृंदावन के निवासियों को इंद्र की मूसलाधार वर्षा से बचाने की घटना का उत्सव है। यह कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष के पहले दिन, दीवाली के अगले दिन (अन्नकूट के रूप में भी जाना जाता है) मनाई जाती है। भक्त गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत का प्रतीकात्मक टीला बनाते हैं और गायों के साथ उसकी पूजा करते हैं। इस पूजा में प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और भगवान कृष्ण की दिव्य सुरक्षा का भाव जुड़ा है। 56 खाद्य पदार्थों (छप्पन भोग) से भव्य अन्नकूट का भोग लगाया जाता है।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

प्राकृतिक आपदाओं से दैवीय सुरक्षा मिलती है, अन्न और समृद्धि की प्रचुरता आती है, मनुष्य, गाय और प्रकृति के बीच के बंधन का सम्मान होता है, अहंकार दूर होता है (जैसे इंद्र का अभिमान टूटा), और भगवान कृष्ण के प्रति भक्ति गहरी होती है।

चरण-दर-चरण विधि

कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा की सुबह गोवर्धन पर्वत के प्रतीक स्वरूप गाय के गोबर का टीला बनाएं। फूलों और पत्तियों से सजाएं और छोटी कृष्ण प्रतिमा रखें। पंचामृत, फूल, अगरबत्ती और दीपकों से पूजा करें। अन्नकूट — विभिन्न प्रकार के पके हुए भोजन और मिठाइयां (आदर्शतः 56 वस्तुएं) का भोग लगाएं। टीले की परिक्रमा करें। गोवर्धन पूजा कथा पढ़ें और प्रसाद वितरित करें।

शुभ मुहूर्त

कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (दीवाली के अगले दिन), प्रतिवर्ष। अनुष्ठान के लिए सुबह का समय सबसे शुभ है। यह एक निश्चित वार्षिक उत्सव है।

आवश्यक सामग्री

  • ·गाय का गोबर (टीले के लिए)
  • ·कृष्ण प्रतिमा
  • ·फूल और पत्तियां
  • ·पंचामृत
  • ·अगरबत्ती
  • ·घी का दीपक
  • ·विविध पके हुए भोजन (अन्नकूट)
  • ·मिठाई
  • ·फल
  • ·तुलसी पत्ते
  • ·कपूर

सामान्य प्रश्न

प्र.गोवर्धन पूजा क्या है?

गोवर्धन पूजा भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर वृंदावन के निवासियों को इंद्र की मूसलाधार वर्षा से बचाने की घटना का उत्सव है। यह कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष के पहले दिन, दीवाली के अगले दिन (अन्नकूट के रूप में भी जाना जाता है) मनाई जाती है। भक्त गाय...

प्र.गोवर्धन पूजा के क्या लाभ हैं?

प्राकृतिक आपदाओं से दैवीय सुरक्षा मिलती है, अन्न और समृद्धि की प्रचुरता आती है, मनुष्य, गाय और प्रकृति के बीच के बंधन का सम्मान होता है, अहंकार दूर होता है (जैसे इंद्र का अभिमान टूटा), और भगवान कृष्ण के प्रति भक्ति गहरी होती है।

प्र.गोवर्धन पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (दीवाली के अगले दिन), प्रतिवर्ष। अनुष्ठान के लिए सुबह का समय सबसे शुभ है। यह एक निश्चित वार्षिक उत्सव है।

प्र.गोवर्धन पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

गाय का गोबर (टीले के लिए), कृष्ण प्रतिमा, फूल और पत्तियां, पंचामृत, अगरबत्ती, घी का दीपक, विविध पके हुए भोजन (अन्नकूट), मिठाई, फल, तुलसी पत्ते, कपूर।

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