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विष्णु एवं वैष्णव — वैदिक पूजा विधि

धन्वंतरि पूजा

देवता भगवान धन्वंतरि (विष्णु अवतार)
अवधि 1–2 घंटे
श्रेणी विष्णु एवं वैष्णव

संक्षिप्त परिचय

धन्वंतरि पूजा भगवान धन्वंतरि की पवित्र आराधना है — जो दिव्य वैद्य, आयुर्वेद के देवता और समुद्र मंथन से निकले चौदहवें रत्न हैं। उन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है जो अमृत कलश और आयुर्वेद के ग्रंथ लेकर प्रकट हुए थे। यह पूजा धनतेरस (कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी) को विशेष रूप से की जाती है, जिसे भारत में राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाया जाता है।

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

रोगों और दीर्घकालिक बीमारियों से रक्षा होती है, बीमार व्यक्तियों की शीघ्र स्वस्थता होती है, दीर्घायु और शारीरिक स्वास्थ्य का वरदान मिलता है, चिकित्सकों और आयुर्वेदिक वैद्यों पर आशीर्वाद बरसता है, अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार के सभी सदस्यों का कल्याण होता है।

चरण-दर-चरण विधि

धनतेरस की शाम को स्वच्छ वेदी बनाएं। धन्वंतरि की मूर्ति या छवि स्थापित करें — वे चार भुजाओं वाले देवता हैं जो शंख, चक्र, जलौका और अमृत कलश धारण किए हैं। पीले फूल, तुलसी पत्ते और पीले फल अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं। धन्वंतरि मंत्र का 108 बार जाप करें। वैद्य और आयुर्वेद छात्र इस दिन अपने चिकित्सा उपकरणों और ग्रंथों की पूजा करें। आरती से समापन करें।

शुभ मुहूर्त

धनतेरस (कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी) सबसे पवित्र दिन है — यह राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस भी है। पूजा प्रदोष काल (संध्याकाल) में करनी चाहिए। साल भर गुरुवार और द्वादशी तिथि धन्वंतरि पूजा के लिए आदर्श हैं।

आवश्यक सामग्री

  • ·धन्वंतरि मूर्ति या चित्र
  • ·पीले फूल (गेंदा, गुलदाउदी)
  • ·तुलसी पत्ते
  • ·घी का दीपक
  • ·पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर)
  • ·पीले फल (केला, अनानास)
  • ·अगरबत्ती
  • ·कपूर
  • ·चंदन का लेप
  • ·अक्षत
  • ·नारियल
  • ·आंवला या जड़ी-बूटी वाली मिठाई प्रसाद के रूप में

सामान्य प्रश्न

प्र.धन्वंतरि पूजा क्या है?

धन्वंतरि पूजा भगवान धन्वंतरि की पवित्र आराधना है — जो दिव्य वैद्य, आयुर्वेद के देवता और समुद्र मंथन से निकले चौदहवें रत्न हैं। उन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है जो अमृत कलश और आयुर्वेद के ग्रंथ लेकर प्रकट हुए थे। यह पूजा धनतेरस (कार्तिक कृष्ण...

प्र.धन्वंतरि पूजा के क्या लाभ हैं?

रोगों और दीर्घकालिक बीमारियों से रक्षा होती है, बीमार व्यक्तियों की शीघ्र स्वस्थता होती है, दीर्घायु और शारीरिक स्वास्थ्य का वरदान मिलता है, चिकित्सकों और आयुर्वेदिक वैद्यों पर आशीर्वाद बरसता है, अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार के सभी सदस्यों का कल्याण होता है।

प्र.धन्वंतरि पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

धनतेरस (कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी) सबसे पवित्र दिन है — यह राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस भी है। पूजा प्रदोष काल (संध्याकाल) में करनी चाहिए। साल भर गुरुवार और द्वादशी तिथि धन्वंतरि पूजा के लिए आदर्श हैं।

प्र.धन्वंतरि पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

धन्वंतरि मूर्ति या चित्र, पीले फूल (गेंदा, गुलदाउदी), तुलसी पत्ते, घी का दीपक, पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर), पीले फल (केला, अनानास), अगरबत्ती, कपूर, चंदन का लेप, अक्षत, नारियल, आंवला या जड़ी-बूटी वाली मिठाई प्रसाद के रूप में।

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