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देवी पूजा — वैदिक पूजा विधि

छिन्नमस्ता पूजा

देवता देवी छिन्नमस्ता
अवधि 1–1.5 घंटे
श्रेणी देवी पूजा

संक्षिप्त परिचय

छिन्नमस्ता पूजा देवी छिन्नमस्ता की आराधना है, जो दस महाविद्याओं में से छठी हैं। उन्हें स्वयं का सिर काटकर, कटे हुए सिर को हाथ में पकड़े और अपनी गर्दन से निकलते रक्त को पीते हुए चित्रित किया गया है, जो अहंकार के विसर्जन और स्वयं के सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है। छिन्नमस्ता जागृत कुंडलिनी ऊर्जा और मृत्यु पर विजय का प्रतिनिधित्व करती हैं।

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

अहंकार नष्ट होता है और साधक को इच्छाओं के बंधन से मुक्ति मिलती है, कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है और आध्यात्मिक प्रगति त्वरित होती है, असंभव बाधाओं का सामना करने का साहस मिलता है, शत्रुओं पर विजय मिलती है, मृत्यु का भय दूर होता है, और सच्चे तांत्रिक साधकों को सिद्धियां प्राप्त होती हैं।

चरण-दर-चरण विधि

यह पूजा आदर्श रूप से योग्य तांत्रिक गुरु के मार्गदर्शन में करें। गंगाजल से स्थान शुद्ध करें और छिन्नमस्ता यंत्र बनाएं। देवी की प्रतिमा या यंत्र स्थापित करें। लाल हिबिस्कस फूल और लाल चंदन का लेप अर्पित करें। सरसों के तेल का दीपक जलाएं। छिन्नमस्ता बीज मंत्र 108 बार जपें। उनके उग्र रूप का ध्यान करें। लाल फल अर्पित कर प्रसाद वितरित करें।

शुभ मुहूर्त

मंगलवार और शुक्रवार सबसे शुभ हैं। कृष्ण पक्ष की अष्टमी और चतुर्दशी, विशेषकर चैत्र और आश्विन माह में। मध्यरात्रि (निशीत काल) छिन्नमस्ता की तांत्रिक पूजा के लिए सबसे शक्तिशाली समय है।

आवश्यक सामग्री

  • ·छिन्नमस्ता की प्रतिमा या यंत्र
  • ·लाल हिबिस्कस फूल
  • ·लाल चंदन का लेप
  • ·सरसों के तेल का दीपक
  • ·लाल कपड़ा
  • ·सुपारी
  • ·अगरबत्ती
  • ·लाल फल (अनार या लाल सेब)
  • ·तांबे का पात्र
  • ·सिंदूर

सामान्य प्रश्न

प्र.छिन्नमस्ता पूजा क्या है?

छिन्नमस्ता पूजा देवी छिन्नमस्ता की आराधना है, जो दस महाविद्याओं में से छठी हैं। उन्हें स्वयं का सिर काटकर, कटे हुए सिर को हाथ में पकड़े और अपनी गर्दन से निकलते रक्त को पीते हुए चित्रित किया गया है, जो अहंकार के विसर्जन और स्वयं के सर्वोच्च बलिदान का ...

प्र.छिन्नमस्ता पूजा के क्या लाभ हैं?

अहंकार नष्ट होता है और साधक को इच्छाओं के बंधन से मुक्ति मिलती है, कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है और आध्यात्मिक प्रगति त्वरित होती है, असंभव बाधाओं का सामना करने का साहस मिलता है, शत्रुओं पर विजय मिलती है, मृत्यु का भय दूर होता है, और सच्चे तांत्रिक साधकों को सिद्धियां प्राप्त होती हैं।

प्र.छिन्नमस्ता पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

मंगलवार और शुक्रवार सबसे शुभ हैं। कृष्ण पक्ष की अष्टमी और चतुर्दशी, विशेषकर चैत्र और आश्विन माह में। मध्यरात्रि (निशीत काल) छिन्नमस्ता की तांत्रिक पूजा के लिए सबसे शक्तिशाली समय है।

प्र.छिन्नमस्ता पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

छिन्नमस्ता की प्रतिमा या यंत्र, लाल हिबिस्कस फूल, लाल चंदन का लेप, सरसों के तेल का दीपक, लाल कपड़ा, सुपारी, अगरबत्ती, लाल फल (अनार या लाल सेब), तांबे का पात्र, सिंदूर।

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