गृह एवं संपत्ति — वैदिक पूजा विधि
वाहन पूजा (कार पूजा)
संक्षिप्त परिचय
वाहन पूजा नए वाहन की खरीद पर सुरक्षित यात्रा और दुर्घटनाओं से सुरक्षा के लिए दैवीय आशीर्वाद पाने हेतु की जाती है। भगवान गणेश को बाधाओं के नाशक और यात्राओं के रक्षक के रूप में पूजा जाता है, जबकि विश्वकर्मा देव — दिव्य वास्तुकार — को वाहनों और यंत्रों के अधिष्ठाता देवता के रूप में आवाहित किया जाता है।
अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
वाहन और यात्रियों को दुर्घटनाओं से बचाता है, यात्राओं में बाधाएं दूर होती हैं, सुरक्षित और सुगम यात्रा के लिए आशीर्वाद मिलता है, वाहन नकारात्मक ऊर्जाओं से शुद्ध होता है और वाहन की दीर्घायु होती है।
चरण-दर-चरण विधि
वाहन को अच्छी तरह साफ करें। वाहन के पास गणेश प्रतिमा के साथ छोटी वेदी स्थापित करें। मंत्रों के साथ गणेश पूजा करें। वाहन पर गंगाजल छिड़कें। बोनट, डैशबोर्ड और स्टीयरिंग व्हील पर लाल तिलक और कुमकुम लगाएं। सामने नींबू-मिर्च की माला लटकाएं। वाहन के सामने नारियल फोड़ें। वाहन के चारों ओर अगरबत्ती घुमाएं। सुरक्षा के लिए काला धागा या गणेश चार्म बांधें।
शुभ मुहूर्त
कोई भी शुभ दिन — दशमी, एकादशी या अच्छे चंद्र और लग्न वाला दिन। सुबह के समय करना सर्वोत्तम। राहु काल और अशुभ तिथियों से बचें।
आवश्यक सामग्री
- ·गणेश प्रतिमा या चित्र
- ·लाल फूल
- ·कुमकुम
- ·हल्दी
- ·अगरबत्ती
- ·कपूर
- ·नारियल
- ·नींबू-मिर्च की माला
- ·गंगाजल
- ·घी का दीपक
- ·पान के पत्ते
- ·फल
सामान्य प्रश्न
प्र.वाहन पूजा (कार पूजा) क्या है?
वाहन पूजा नए वाहन की खरीद पर सुरक्षित यात्रा और दुर्घटनाओं से सुरक्षा के लिए दैवीय आशीर्वाद पाने हेतु की जाती है। भगवान गणेश को बाधाओं के नाशक और यात्राओं के रक्षक के रूप में पूजा जाता है, जबकि विश्वकर्मा देव — दिव्य वास्तुकार — को वाहनों और यंत्रों ...
प्र.वाहन पूजा (कार पूजा) के क्या लाभ हैं?
वाहन और यात्रियों को दुर्घटनाओं से बचाता है, यात्राओं में बाधाएं दूर होती हैं, सुरक्षित और सुगम यात्रा के लिए आशीर्वाद मिलता है, वाहन नकारात्मक ऊर्जाओं से शुद्ध होता है और वाहन की दीर्घायु होती है।
प्र.वाहन पूजा (कार पूजा) का सबसे अच्छा समय क्या है?
कोई भी शुभ दिन — दशमी, एकादशी या अच्छे चंद्र और लग्न वाला दिन। सुबह के समय करना सर्वोत्तम। राहु काल और अशुभ तिथियों से बचें।
प्र.वाहन पूजा (कार पूजा) के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
गणेश प्रतिमा या चित्र, लाल फूल, कुमकुम, हल्दी, अगरबत्ती, कपूर, नारियल, नींबू-मिर्च की माला, गंगाजल, घी का दीपक, पान के पत्ते, फल।