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वैदिक ज्योतिष एवं ज्योतिष गणना

गृह एवं संपत्ति, वैदिक पूजा विधि

गृह प्रवेश

देवता भगवान गणेश, वास्तु पुरुष, माँ लक्ष्मी
अवधि 4–8 घंटे
श्रेणी गृह एवं संपत्ति

संक्षिप्त परिचय

गृह प्रवेश एक पवित्र गृह प्रवेश समारोह है जो पहली बार नए घर में प्रवेश करते समय किया जाता है। इसमें कई अनुष्ठान शामिल हैं: बाधाएं दूर करने के लिए गणेश पूजा, घर की ऊर्जा सामंजस्य के लिए वास्तु शांति, समृद्धि आमंत्रण के लिए लक्ष्मी पूजा, शुद्धिकरण के लिए हवन, और नई रसोई में दूध (खीर) उबालने की परंपरा।

अंतिम अपडेट: 13 जून 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

नए घर को सकारात्मक ऊर्जा से आशीर्वाद मिलता है, निवासियों की समृद्धि और सुख सुनिश्चित होती है, नकारात्मक ऊर्जाएं और वास्तु दोष दूर होते हैं।

चरण-दर-चरण विधि

शुभ मुहूर्त चुनें। घर की महिला पहले कलश और उबलते दूध के साथ प्रवेश करती है। प्रवेश द्वार पर गणेश पूजा करें। वास्तु शांति और नवग्रह पूजा करें। नई रसोई में दूध उबालें जब तक वह उफन न जाए (समृद्धि का प्रतीक)। खीर बांटें।

शुभ मुहूर्त

ज्योतिषी द्वारा निर्धारित शुभ मुहूर्त, आमतौर पर पुष्य, रोहिणी या उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में। अमावस्या और अशुभ समय से बचें।

आवश्यक सामग्री

  • ·कलश
  • ·आम के पत्ते
  • ·नारियल
  • ·रसोई के नए बर्तन
  • ·दूध
  • ·चावल
  • ·हवन सामग्री
  • ·फूल
  • ·अगरबत्ती
  • ·गंगाजल

सामान्य प्रश्न

प्र.गृह प्रवेश क्या है?

गृह प्रवेश एक पवित्र गृह प्रवेश समारोह है जो पहली बार नए घर में प्रवेश करते समय किया जाता है। इसमें कई अनुष्ठान शामिल हैं: बाधाएं दूर करने के लिए गणेश पूजा, घर की ऊर्जा सामंजस्य के लिए वास्तु शांति, समृद्धि आमंत्रण के लिए लक्ष्मी पूजा, शुद्धिकरण के ल...

प्र.गृह प्रवेश के क्या लाभ हैं?

नए घर को सकारात्मक ऊर्जा से आशीर्वाद मिलता है, निवासियों की समृद्धि और सुख सुनिश्चित होती है, नकारात्मक ऊर्जाएं और वास्तु दोष दूर होते हैं।

प्र.गृह प्रवेश का सबसे अच्छा समय क्या है?

ज्योतिषी द्वारा निर्धारित शुभ मुहूर्त, आमतौर पर पुष्य, रोहिणी या उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में। अमावस्या और अशुभ समय से बचें।

प्र.गृह प्रवेश के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

कलश, आम के पत्ते, नारियल, रसोई के नए बर्तन, दूध, चावल, हवन सामग्री, फूल, अगरबत्ती, गंगाजल।

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