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देवी पूजा — वैदिक पूजा विधि

बगलामुखी पूजा

देवता देवी बगलामुखी (पीताम्बरा देवी)
अवधि 3–5 घंटे (सामान्य); 11–41 दिन (पूर्ण साधना)
श्रेणी देवी पूजा

संक्षिप्त परिचय

बगलामुखी पूजा आठवीं महाविद्या देवी बगलामुखी को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली तांत्रिक अनुष्ठान है। पीले वस्त्रों में सुशोभित यह देवी अपने मुद्गर से शत्रु की जिह्वा खींचकर उसे स्तंभित कर देती हैं। दतिया (मध्य प्रदेश) स्थित पीताम्बरा पीठ में इनकी विशेष पूजा होती है। न्यायालय के मुकदमों, राजनीतिक विरोध, व्यापारिक शत्रुओं, काले जादू और दुर्निवार बाधाओं में यह पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। साधना में पीले रंग का विशेष महत्व है।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

शत्रुओं को स्तंभित करती है, न्यायालय के मुकदमे जीते जाते हैं, झूठे आरोप और बदनामी रुकती है, काला जादू और नज़र दोष नष्ट होता है, प्रतियोगी परीक्षाओं एवं चुनावों में विजय मिलती है, षड्यंत्र और अफवाहें थमती हैं।

चरण-दर-चरण विधि

पीले वस्त्र से सजी वेदी पूर्व या उत्तर दिशा में स्थापित करें। बगलामुखी यंत्र और प्रतिमा रखें। हल्दी के जल से स्थान शुद्ध करें। साधक पीले वस्त्र पहनें। गणेश पूजा और नवार्ण मंत्र से आरंभ करें। बगलामुखी अष्टाक्षर मंत्र का हल्दी माला से न्यूनतम 1008 बार जप करें। पीले फूल, केसर हलवा और हल्दी मिश्रित जल अर्पित करें। सरसों से हवन करें। आरती करके पीली मिठाई प्रसाद में बांटें।

शुभ मुहूर्त

मंगलवार या शनिवार की रात, कृष्ण पक्ष की अष्टमी-नवमी, चैत्र मास। निशीथ काल (मध्यरात्रि) सर्वाधिक शक्तिशाली समय है। वैशाख शुक्ल अष्टमी को बगलामुखी जयंती मनाई जाती है।

आवश्यक सामग्री

  • ·बगलामुखी यंत्र
  • ·पीला कपड़ा (वेदी के लिए)
  • ·हल्दी
  • ·पीली सरसों
  • ·पीले फूल (गेंदा, चम्पा)
  • ·केसर हलवा
  • ·हल्दी माला
  • ·पीली मिठाई
  • ·हवन के लिए घी
  • ·नींबू
  • ·पीला धागा

सामान्य प्रश्न

प्र.बगलामुखी पूजा क्या है?

बगलामुखी पूजा आठवीं महाविद्या देवी बगलामुखी को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली तांत्रिक अनुष्ठान है। पीले वस्त्रों में सुशोभित यह देवी अपने मुद्गर से शत्रु की जिह्वा खींचकर उसे स्तंभित कर देती हैं। दतिया (मध्य प्रदेश) स्थित पीताम्बरा पीठ में इनकी विशेष प...

प्र.बगलामुखी पूजा के क्या लाभ हैं?

शत्रुओं को स्तंभित करती है, न्यायालय के मुकदमे जीते जाते हैं, झूठे आरोप और बदनामी रुकती है, काला जादू और नज़र दोष नष्ट होता है, प्रतियोगी परीक्षाओं एवं चुनावों में विजय मिलती है, षड्यंत्र और अफवाहें थमती हैं।

प्र.बगलामुखी पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

मंगलवार या शनिवार की रात, कृष्ण पक्ष की अष्टमी-नवमी, चैत्र मास। निशीथ काल (मध्यरात्रि) सर्वाधिक शक्तिशाली समय है। वैशाख शुक्ल अष्टमी को बगलामुखी जयंती मनाई जाती है।

प्र.बगलामुखी पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

बगलामुखी यंत्र, पीला कपड़ा (वेदी के लिए), हल्दी, पीली सरसों, पीले फूल (गेंदा, चम्पा), केसर हलवा, हल्दी माला, पीली मिठाई, हवन के लिए घी, नींबू, पीला धागा।

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