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विष्णु एवं वैष्णव — वैदिक पूजा विधि

अक्षय तृतीया पूजा

देवता भगवान विष्णु एवं देवी लक्ष्मी
अवधि 1–3 घंटे
श्रेणी विष्णु एवं वैष्णव

संक्षिप्त परिचय

अक्षय तृतीया, जिसे अखा तीज भी कहते हैं, हिंदू पंचांग के सर्वाधिक शुभ दिनों में से एक है। यह वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ती है। "अक्षय" शब्द का अर्थ है अनश्वर या सदा बढ़ने वाला, और इस दिन किया गया या दान किया गया सब कुछ अक्षय फल देता है। यह वह दिन है जब भगवान विष्णु परशुराम के रूप में अवतरित हुए और त्रेता युग का आरंभ हुआ। भक्त भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की बड़ी श्रद्धा से पूजा करते हैं, दान करते हैं, सोना खरीदते हैं और स्थायी समृद्धि के लिए नए उद्यम आरंभ करते हैं।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

अक्षय तृतीया पूजा से शाश्वत धन, प्रचुरता और वह समृद्धि प्राप्त होती है जो कभी कम नहीं होती। इस दिन किए गए सभी दान-पुण्य और आध्यात्मिक अनुष्ठानों के फल कई गुना बढ़ जाते हैं। भक्तों को नए व्यवसाय, विवाह और महत्वपूर्ण नई शुरुआतों में सफलता के लिए भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है। यह पूजा कर्म को शुद्ध करती है, ऋणों से मुक्ति दिलाती है और सोना, संपत्ति तथा दीर्घकालिक उद्यमों में निवेश के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।

चरण-दर-चरण विधि

जल्दी उठें, स्नान करें और पीले या सफेद वस्त्र पहनें। भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की प्रतिमाओं के साथ पूजा वेदी सजाएं। पीले फूल, तुलसी के पत्ते, अक्षत (चावल), फल और मिठाई अर्पित करें। घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं। विष्णु सहस्रनाम या श्री सूक्तम का पाठ करें। धन और समृद्धि के लिए लक्ष्मी पूजा करें। जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या सोना दान करें — अक्षय तृतीया पर किया गया दान अक्षय पुण्य देता है। पूजा के बाद सोना खरीदें या नए उद्यम आरंभ करें। आरती और प्रसाद वितरण के साथ समापन करें।

शुभ मुहूर्त

वैशाख शुक्ल तृतीया (वैशाख के शुक्ल पक्ष का तीसरा दिन), सामान्यतः अप्रैल–मई। संपूर्ण दिन स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना जाता है।

आवश्यक सामग्री

  • ·भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की प्रतिमा
  • ·पीले फूल और गेंदा
  • ·तुलसी के पत्ते
  • ·अक्षत (साबुत चावल)
  • ·फल और मिठाई
  • ·घी का दीपक और अगरबत्ती
  • ·सोने का सिक्का या आभूषण
  • ·पीला कपड़ा
  • ·पूजा थाली और कलश
  • ·चंदन का लेप

सामान्य प्रश्न

प्र.अक्षय तृतीया पूजा क्या है?

अक्षय तृतीया, जिसे अखा तीज भी कहते हैं, हिंदू पंचांग के सर्वाधिक शुभ दिनों में से एक है। यह वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ती है। "अक्षय" शब्द का अर्थ है अनश्वर या सदा बढ़ने वाला, और इस दिन किया गया या दान किया गया सब कुछ अक्षय फल देता ...

प्र.अक्षय तृतीया पूजा के क्या लाभ हैं?

अक्षय तृतीया पूजा से शाश्वत धन, प्रचुरता और वह समृद्धि प्राप्त होती है जो कभी कम नहीं होती। इस दिन किए गए सभी दान-पुण्य और आध्यात्मिक अनुष्ठानों के फल कई गुना बढ़ जाते हैं। भक्तों को नए व्यवसाय, विवाह और महत्वपूर्ण नई शुरुआतों में सफलता के लिए भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है। यह पूजा कर्म को शुद्ध करती है, ऋणों से मुक्ति दिलाती है और सोना, संपत्ति तथा दीर्घकालिक उद्यमों में निवेश के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।

प्र.अक्षय तृतीया पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

वैशाख शुक्ल तृतीया (वैशाख के शुक्ल पक्ष का तीसरा दिन), सामान्यतः अप्रैल–मई। संपूर्ण दिन स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना जाता है।

प्र.अक्षय तृतीया पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की प्रतिमा, पीले फूल और गेंदा, तुलसी के पत्ते, अक्षत (साबुत चावल), फल और मिठाई, घी का दीपक और अगरबत्ती, सोने का सिक्का या आभूषण, पीला कपड़ा, पूजा थाली और कलश, चंदन का लेप।

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